तमिलनाडु में जनता से किए गए वादों के अनुसार विजय के नेतृत्व वाली नई सरकार ने सत्ता संभालते ही तेजी से कई महत्वपूर्ण फैसले लिए। सरकार ने शुरुआत में ही प्रशासनिक सुधार और जनकल्याण योजनाओं पर काम तेज कर दिया है।
नई सरकार का समर्थन आधार बहुमत से थोड़ा अधिक है, जिसमें कुल 120 विधायकों का समर्थन शामिल है। इसमें पांच सहयोगी दल भी हैं, जिनका साथ विचारधारात्मक कारणों से अधिक राजनीतिक परिस्थितियों पर आधारित माना जा रहा है। लेफ्ट पार्टियों CPI और CPM ने बाहर से समर्थन दिया है, जिसका मुख्य उद्देश्य भाजपा और उसके सहयोगियों को सत्ता से दूर रखना बताया जा रहा है।
Indian National Congress ने भी सरकार को समर्थन दिया है। हालांकि, उनका तर्क भी राजनीतिक संतुलन बनाए रखने से जुड़ा हुआ है। इससे स्पष्ट है कि सरकार को गठबंधन राजनीति के बीच संतुलन बनाकर चलना होगा।
सत्ता संभालते ही सरकार ने 200 यूनिट मुफ्त बिजली और एक विशेष टास्क फोर्स के गठन की घोषणा की है। इन फैसलों को जनता से किए गए वादों की दिशा में पहला बड़ा कदम माना जा रहा है।
सरकार ने आरोप लगाया है कि पिछली DMK सरकार राज्य पर 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज छोड़कर गई है। आंकड़ों के अनुसार 2024-25 में तमिलनाडु सब्सिडी खर्च के मामले में देश में दूसरे स्थान पर रहा, जहां 52,603 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
मुख्यमंत्री ने राज्य की वित्तीय स्थिति पर श्वेत पत्र (White Paper) जारी करने की बात कही है। इसे सरकार की आर्थिक पारदर्शिता और सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि बढ़ते कर्ज और फ्रीबीज योजनाओं के बीच संतुलन बनाना एक बड़ी चुनौती होगी।