कार्यक्रम की शुरुआत विधिवत पूजा-अर्चना और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुई। जैसे ही भगवान नरसिंह का प्राकट्य हुआ, पूरा परिसर जयकारों से गूंज उठा। वर्षों से चली आ रही इस परंपरा को देखने के लिए हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, जो इस आयोजन को नगर की पहचान बना चुके हैं।
