जवारों को रथों में शिरोधार्य कर ढोल-मांदल के साथ घर लेकर आएंगे। वहीं रविवार व सोमवार को अपने-अपने घरों से महिला-पुरुष समूह के साथ गणगौर माता के रथों को श्रृंगारित कर सिर पर रखकर गीत गाते झामरिया बाग में ले जाएंगे। इस दौरान झामरिया बाग में उत्सवी माहौल नजर आएगा।
