बंदरझिरी स्कूल में दूसरे स्कूल के बच्चों को शिफ्ट किया गया जहां केवल दो कमरे हैं। एक कमरे में एक स्कूल के बच्चे बढ़ते हैं जबकि दूसरे कमरे में दूसरे स्कूल के बच्चे बैठने को मजबूर हैं। पहले यहां गांव के बच्चे अलग-अलग कक्षाओं में पढ़ते थे। इतनी भीड़ में न तो बच्चों को बैठने की जगह मिलती है और न ही पढ़ाई का सही माहौल।
