हाथरस मामले में उच्चतम न्यायालय का फैसला इंसाफ की उम्मीद को मजबूत करता है- प्रियंका गाँधी
कांग्रेस ने हाथरस में दलित लड़की से कथित सामूहिक बलात्कार और उसकी मौत के मामले की सीबीआई जांच इलाहाबाद उच्च न्यायालय की निगरानी में किए जाने संबंधी उच्चतम न्यायालय के आदेश का स्वागत करते हुए मंगलवार को कहा कि इससे इंसाफ की उम्मीद को मजबूती मिलेगी।
पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी ने ट्वीट किया, हाथरस मामले में उच्चतम न्यायालय का फैसला इंसाफ की उम्मीद को मजबूत करता है। परिवार की पहले दिन से मांग थी कि अदालत की निगरानी में जांच हो।
हाथरस मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला इंसाफ की उम्मीद को मजबूत करता है। परिवार की पहले दिन से माँग थी कि कोर्ट की निगरानी में जाँच हो।
हाथरस की पीड़िता, उसके परिवार के साथ उप्र सरकार द्वारा जघन्य व्यवहार किया गया। चरित्र हनन किया गया। दुर्भावना व पूर्वाग्रह से निर्णय लिए गए।
— Priyanka Gandhi Vadra (@priyankagandhi) October 27, 2020
उन्होंने आरोप लगाया, हाथरस की पीड़िता, उसके परिवार के साथ उप्र सरकार द्वारा जघन्य व्यवहार किया गया। चरित्र हनन किया गया। दुर्भावना व पूर्वाग्रह से निर्णय लिए गए।
यूपी में कांग्रेस प्रभारी प्रियंका गांधी ने अपने ट्वीट में लिखा है, ‘हाथरस मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला इंसाफ की उम्मीद को मजबूत करता है। परिवार की पहले दिन से माँग थी कि कोर्ट की निगरानी में जाँच हो।
हाथरस की पीड़िता, उसके परिवार के साथ उप्र सरकार द्वारा जघन्य व्यवहार किया गया। चरित्र हनन किया गया। दुर्भावना व पूर्वाग्रह से निर्णय लिए गए।
कांग्रेस प्रवक्ता और अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष सुष्मिता देव ने कहा, ‘‘ हाथरस के मामले पर आए उच्चतम न्यायालय के निर्णय का स्वागत करती हूं। अदालत की निगरानी में जांच की मांग परिवार ने की थी और इस लड़ाई में राहुल गांधी तथा प्रियंका गांधी ने उनका साथ दिया।
सुप्रीम कोर्ट के हाथरस के मामले पर आये निर्णय का मैं स्वागत करती हूँ. कोर्ट की निगरानी में जाँच की मांग परिवार ने की थी और इस लड़ाई में श्री @RahulGandhi जी और श्रीमती @priyankagandhi जी ने उनका साथ दिया.#HathrasCase
— Sushmita Dev (@sushmitadevinc) October 27, 2020
उन्होंने कहा, यह ज़रूरी था क्योंकि उत्तर प्रदेश की पुलिस और प्रशासन अन्याय करने पर तुले हुए थे। अगर उत्तर प्रदेश की सरकार प्रदेश की बेटियों को सुरक्षित नहीं रख सकती तो प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाया जाना चाहिए।