बड़वानी जिले के काली बेड़ी और कुंडिया गांव के बीच रात के समय मिट्टी से भरे डंपरों की आवाजाही को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि अवैध रूप से चल रहे भारी वाहनों के कारण दुर्घटना का खतरा लगातार बढ़ रहा है और स्थानीय सड़कों को भी नुकसान पहुंच रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि जब ग्राम सरपंच और अन्य लोगों ने डंपरों की आवाजाही का विरोध किया, तो कथित रूप से उनके साथ मारपीट की गई। इसके बाद हैरानी की बात यह रही कि सरपंच के खिलाफ ही एफआईआर दर्ज कर दी गई, जबकि उनकी शिकायत पर कोई तत्काल कार्रवाई नहीं हुई।
इस घटनाक्रम के बाद दोनों गांवों में तनाव का माहौल बन गया है। बड़ी संख्या में ग्रामीण बड़वानी शहर कोतवाली पहुंचे और थाना प्रभारी से मिलकर सरपंच के साथ हुई कथित मारपीट की जांच एवं डंपर संचालन की वैधता की जांच की मांग की। ग्रामीणों ने निष्पक्ष कार्रवाई की मांग करते हुए नाराजगी व्यक्त की।
ग्रामीणों का कहना है कि डूब क्षेत्र को जोड़ने वाली सड़कें पहले से ही कमजोर स्थिति में हैं, ऐसे में रात के समय भारी वाहनों की लगातार आवाजाही से स्थिति और गंभीर हो रही है। इससे न केवल सड़कें क्षतिग्रस्त हो रही हैं बल्कि जनसुरक्षा पर भी खतरा बढ़ गया है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर डंपर संचालन की अनुमति और वैधता की जांच की जाए। साथ ही, सरपंच के साथ कथित मारपीट करने वालों पर भी कार्रवाई की जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो क्षेत्र में बड़ा विवाद उत्पन्न हो सकता है।
शहर कोतवाली प्रभारी बलजीत सिंह बिसेन ने बताया कि वाहन संचालन को लेकर दोनों पक्षों में विवाद की स्थिति बनी है। एक व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, जबकि अन्य शिकायतों की भी जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इस पूरे मामले में ग्रामीणों का सबसे बड़ा सवाल यही है कि रात के समय भारी वाहनों की आवाजाही को किसकी अनुमति प्राप्त है। यदि यह वैध है तो जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं है, और यदि अवैध है तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई। फिलहाल क्षेत्र में तनाव बना हुआ है और सभी की नजरें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं।