सुप्रीम कोर्ट ने वैश्विक महामारी कोविड-19 के दौरान कुछ मीडिया संगठनों द्वारा पत्रकारों समेत कर्मचारियों को जबरन छुट्टी पर भेजने, निकाले जाने की कथित घटनाओं के खिलाफ दायर याचिका पर सोमवार को न्यायालय ने इस पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। पत्रकारों के संगठनों का आरोप है कि इन मीडिया संस्थानों ने कोरोना वायरस के कारण से लाॅकडाउन के दौरान कर्मचारियों को नौकरी से निकालने, वेतन में कटौती करने के नोटिस दिए है।
न्यायमूर्ति एनवी रमण, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति बीआर गवई की पीठ ने पत्रकारों के संगठनों की याचिका पर विडियों काॅन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई के दौरान केंद्र, इंडियन न्यूजपेपर्स सोसायटी, द न्यूज ब्राडकास्टर्स एसोसिएशन को नोटिस दिए। पीठ ने इस मामले की दो सप्ताह बाद आगे की सुनवाई करेंगी।
केंद्र सरकार की ओर से साॅलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ से कहा कि इस समय सरकार को कोई नोटिस जारी नहीं किया जाए। इस पर पीठ ने कहा कि ये मामले ऐसे है जिन पर सुनवाई की आवश्यकता है और इसमें कुछ गंभीर मुद्दे उठाए गए है।
याचिका में न्यायालय से अनुरोध किया गया है कि समाचार पत्रों, डिजिटल मीडिया समेत अन्य मीडिया के क्षेेत्र में काम करने वाले पत्रकारों को नौकरी पर रखने वाले सभी व्यक्तियों को अपने कर्मचारियों को मौखिक या लिखित में दिए गए सभी नोटिस अगले आदेश तक तत्काल निलंबित करने का निर्देश दिया जाए। याचिका में कहा गया है कि प्रधानमंत्री तक ने कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त करने या उनके वेतन में कटौती नहीं करने की अपील की है।