पश्चिम बंगाल में जल्द ही विधानसभा चुनाव होने वाले है। जिसको लेकर सभी पार्टी ने अपनी तयारी तेज कर दी है। जैसे जैसे बंगाल का विधान सभा चुनाव पास आता जा रहा है वैसे वैसे बंगाल की राजनीति गरमाती जा रही है। सभी पार्टी की तरफ से बयान बाजी तेज होती जा रही है।
इस बीच आज पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने अपने राजनीतिक प्रतिद्वंदी और दिग्गज नेता शुभेंदु अधिकारी को चुनौती देते हुए एलान किया कि वह उनके गढ़ नंदीग्राम से आगामी विधानसभा चुनाव लड़ेंगी।
उसके तुरंत बाद बीजेपी नेता अधिकारी ने चुनौती स्वीकार कर ली और कहा कि वह चुनाव में उन्हें हरायेंगे, वरना राजनीति छोड़ देंगे। अधिकारी हाल ही में ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गये थे।
अधिकारी ने सीएम ममता की चुनौती स्वीकार करते हुए ट्वीट कर कहा, ”स्वागत है दीदी, 21 साल से आपके साथ खड़ा था। इस बार नंदीग्राम में आमने-सामने मुलाक़ात होगी। इंतज़ार रहेगा।”
आप को बता दे कि सीएम ममता ने नंदीग्राम में एक रैली में कहा कि दूसरे दलों में जाने वालों को लेकर उन्हें कोई चिंता नहीं क्योंकि जब तृणमूल कांग्रेस बनी थी, तब उनमें से शायद ही कोई साथ था।
बिना किसी का नाम लिए ममता ने कहा कि इन नेताओं ने पिछले कुछ सालों के दौरान ‘अपने द्वारा लुटे गये’ धन को बचाने के लिए पार्टी (तृणमूल कांग्रेस पार्टी) छोड़ी। मैंने हमेशा से नंदीग्राम से विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार अभियान की शुरुआत की है। यह मेरे लिए भाग्यशाली स्थान है।
सीएम ने आगे कहा कि इस बार,मुझे लगा कि यहां से विधानसभा चुनाव लड़ना चाहिए। मैं प्रदेश पार्टी अध्यक्ष सुब्रत बख्शी से इस सीट से मेरा नाम मंजूर करने का अनुरोध करती हूं। आप को बता दे कि मंच पर मौजूद बख्शी ने तुरंत अनुरोध स्वीकार कर लिया।
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘ यदि संभव हुआ तो मैं भवानीपुर और नंदीग्राम दोनों जगहों से चुनाव लडूंगी। नंदीग्राम मेरी बड़ी बहन है और भवानीपुर मेरी छोटी बहन। यदि मैं भवानीपुर से चुनाव नहीं लड़ पायी तो मैं वहां से कोई और मजबूत उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारूंगी।’’
उन्होंने बीजेपी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि वह ‘कुछ लोगों ’ को बंगाल को कभी बीजेपी के हाथों नहीं बेचने देंगी। इस ही के साथ आप को बता दे कि पश्चिम बंगाल में अप्रैल-मई में विधानसभा चुनाव होने हैं।
कोलकाता में रोड शो और जनसभा कर रहे बीजेपी नेता अधिकारी ने कहा यदि मुझे मेरी पार्टी (बीजेपी) नंदीग्राम से चुनाव मैदान में उतारती है तो मैं उनको कम से कम 50,000 वोटों के अंतर से हराऊंगा, अन्यथा मैं राजनीति छोड़ दूंगा।
इस ही के साथ आप को बता दे कि बीते माह दिसम्बर में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की मौजूदगी में बीजेपी में शामिल हुए शुभेंदु अधिकारी ने बाद में अपने छोटे भाई सौमेंदु को भी बीजेपी में शामिल करा लिया था।
वहीं शुभेंदु अधिकारी के छोटे भाई दिब्येंदु और पिता शिशिर अधिकारी अभी भी टीएमसी से तमुक और कांथी से लोकसभा सदस्य है। लेकिन दोनों ही सोमवार को हुई ममता बनर्जी की रैली में नहीं पहुंचे, जिसके बाद से कयासों का दौर जारी है।
इन अधिकारी बंधुओं का पूर्व और पश्चिमी मिदनापुर, बांकुरा, पुरुलिया, झारग्राम और बीरभूम तथा अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले के कम से कम 40-45 विधानसभा क्षेत्रों में अच्छा खासा प्रभाव है।
नंदीग्राम विशेष आर्थिक क्षेत्र के निर्माण के लिए वाम मोर्चा सरकार के ‘जबरन’ ‘जमीन अधिग्रहण के विरूद्ध विशाल जनांदोलन का केंद्र था। लंबे समय तक चले और रक्तरंजित रहे इस आंदोलन के चलते ही बनर्जी और उनकी पार्टी उभरी और 2011 में तृणमूल कांग्रेस सत्ता में पहुंचीं। इसी के साथ 34 साल से जारी वाम शासन पर पूर्ण विराम लगा था।
अधिकारी नंदीग्राम आंदोलन का चेहरा समझे जाते हैं। हालांकि पाला बदलकर बीजेपी में जा चुके अधिकारी ने अक्सर बनर्जी पर आरोप लगाया कि जिस क्षेत्र ने बनर्जी को सत्ता दिलाने में मदद पहुंचायी, उस क्षेत्र के लोगों को उन्होंने भुला दिया। आप को बता दे कि ममता बनर्जी फिलहाल दक्षिण कोलकाता के भवानीपुर से विधायक हैं।
दूसरे दलों के नेताओं को तोड़कर अपनी पार्टी में शामिल करने को लेकर बीजेपी पर निशाना साधते हुए ममता बनर्जी ने कटाक्ष किया कि बीजेपी देश में सबसे बड़ी कबाड़ पार्टी है।
ममता ने आगे कहा बीजेपी कोई राजनीतिक दल नहीं है बल्कि काले को सफेद करने वाला वाशिंग पाउडर है… वह तृणमूल कांग्रेस के नेताओं को अपने में शामिल करने के वास्ते पैसे और धमकियों का इस्तेमाल कर रही हैं।
अपनी पार्टी के दल-बदल का जिक्र करते हुए ममता ने कहा कि बीजेपी भले ही कुछ नेताओं को खरीद ले लेकिन वह बंगाल के लोगों को खरीद नहीं सकती। सीएम बनर्जी ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस लगातार तीसरी बार जीतकर सत्ता में आयेगी और भाजपा का सफाया हो जाएगा।