Axiom-4 मिशन पर ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने अपने अनुभव साझा किए और मिशन की सफलता की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वे मिशन पायलट के रूप में क्रू ड्रैगन व्हीकल में कमांडर के साथ काम कर रहे थे और अंतरिक्ष में भारतीय शोधकर्ताओं द्वारा विकसित किए गए प्रयोगों को अंजाम दिया। शुभांशु ने STEM प्रदर्शन, तस्वीरें और वीडियोग्राफी भी की। उन्होंने बताया कि मानव अंतरिक्ष मिशन से प्राप्त अनुभव प्रशिक्षण से कहीं अधिक मूल्यवान है, क्योंकि वहां रहकर शरीर और मन कई बदलावों से गुजरते हैं और अतिरिक्त ज्ञान प्राप्त होता है।
शुभांशु ने बताया कि मिशन से इकट्ठा की गई जानकारी भारत के भविष्य के अंतरिक्ष प्रयासों जैसे गगनयान और भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए बेहद उपयोगी होगी। उन्होंने कहा कि क्रू ड्रैगन में चार सीटें होती हैं और उनका काम सिस्टम के साथ बातचीत करना तथा तकनीकी उद्देश्यों को पूरा करना था। 20 दिन के मिशन के दौरान उन्होंने अंतरिक्ष में शरीर पर पड़ने वाले प्रभावों और गुरुत्वाकर्षण में बदलावों का अनुभव साझा किया।
शुभांशु ने मिशन की सफलता पर खुशी जताते हुए कहा कि सभी तकनीकी उद्देश्यों को पूरा किया गया और मिशन से ऐसी जानकारी प्राप्त हुई जो अन्यथा मापा या दर्ज नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि भारत आज भी अंतरिक्ष से सुंदर और श्रेष्ठ दिखाई देता है और अंत में “जय हिंद, जय भारत” की भावनाएँ व्यक्त कीं। मिशन की सफलता ने भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम में नए आयाम स्थापित किए और भविष्य में अंतरिक्ष में मानव मिशनों की दिशा और तकनीकी तैयारियों को मजबूत किया।