मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में विकास के दावों के बीच जमीनी हकीकत सवालों के घेरे में है। ग्राम पंचायत मालेगांव के अंतर्गत आने वाला मोहनढाना गांव आज़ादी के 78 वर्षों बाद भी पक्की सड़क की सुविधा से वंचित है। ग्रामीणों का कहना है कि अब तक कई बार प्रशासन को अवगत कराने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो पाया है।
बरसात के मौसम में गांव को जोड़ने वाला कच्चा मार्ग पूरी तरह कीचड़ और दलदल में बदल जाता है, जिससे आवागमन लगभग ठप हो जाता है। इस स्थिति के कारण ग्रामीणों को रोजमर्रा के कामों में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
गांव में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति भी बेहद चिंताजनक है। गंभीर रूप से बीमार मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए बैलगाड़ी और निजी साधनों का सहारा लेना पड़ता है, क्योंकि एम्बुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती। वहीं स्कूली बच्चों को भी रोजाना जोखिम भरे रास्तों से होकर स्कूल जाना पड़ता है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि वर्षों से जनप्रतिनिधियों और प्रशासन को कई बार आवेदन दिए जा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। लगातार अनदेखी से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

नाराज ग्रामीण अब अपनी मांगों को लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और अंतिम बार सड़क निर्माण की मांग रखी है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सड़क निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया, तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
अब सभी की नजरें जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के अगले कदम पर टिकी हैं। देखना होगा कि वर्षों पुरानी इस समस्या का समाधान कब तक किया जाता है और क्या मोहनढाना गांव को जल्द पक्की सड़क की सुविधा मिल पाती है या नहीं।