जहानाबाद। सदर अस्पताल की नवजात शिशु देखभाल इकाई (SNCU) के बाहर बारिश और जलजमाव के बीच नवजात बच्चों के परिजनों के रहने का मामला सामने आया है। अस्पताल परिसर में पानी जमा होने के कारण बच्चों की मां और अन्य परिजन तिरपाल लगाकर रहने को मजबूर हैं। बारिश के दौरान उन्हें पानी के बीच ही रात गुजारनी पड़ रही है।
सदर अस्पताल के SNCU में गंभीर हालत में नवजात बच्चों का इलाज चल रहा है। बच्चों के साथ आए परिजनों को उपचार के दौरान अस्पताल परिसर में ही रुकना पड़ता है। बारिश के बाद परिसर में जलजमाव होने से उनके सामने रहने की समस्या और गंभीर हो गई है।
परिजनों के मुताबिक बारिश और आंधी के बीच तिरपाल के सहारे रहना बेहद मुश्किल हो रहा है। कई लोगों को पानी के बीच ही बैठने, सोने और भोजन करने की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। सबसे बड़ी चिंता उन माताओं और परिजनों की है, जिनके नवजात बच्चे SNCU में भर्ती हैं।
SNCU में केवल जहानाबाद के ग्रामीण इलाकों से ही नहीं, बल्कि मसौढ़ी, पटना और अरवल के किंजर समेत आसपास के अन्य क्षेत्रों से भी लोग नवजात बच्चों को इलाज के लिए लेकर पहुंचते हैं। बच्चों के अस्पताल में भर्ती रहने तक परिजनों को भी वहीं रहना पड़ता है।

परिजनों का कहना है कि उनके नवजात बच्चे अस्पताल में उपचाराधीन हैं और उनकी स्थिति को देखते हुए उन्हें अकेला छोड़कर बाहर जाना संभव नहीं है। ऐसे में अस्पताल परिसर में उचित ठहरने की व्यवस्था नहीं होने से उन्हें बारिश और जलजमाव के बीच रहने की मजबूरी बनी हुई है।
संजू देवी, सोनो कुमारी और गीता देवी समेत कई परिजनों ने अस्पताल परिसर में जलजमाव और रहने की व्यवस्था को लेकर अपनी परेशानियां बताईं। उनका कहना है कि बच्चों के इलाज के साथ-साथ उनके लिए भी सुरक्षित और सूखी जगह की व्यवस्था जरूरी है।
बताया गया कि जिस स्थान पर नवजात बच्चों के परिजन जलजमाव के बीच रहने को मजबूर हैं, उसी परिसर में सिविल सर्जन कार्यालय भी मौजूद है। मामले को लेकर सिविल सर्जन डॉ. हरीश चंद्र चौधरी ने अस्पताल की व्यवस्थाओं में जल्द सुधार किए जाने की बात कही है।