सीहोर शहर में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार, साहसकीय अस्पताल से लगभग 500 मीटर की दूरी पर एक ही नाम से दो अस्पताल संचालित किए जा रहे थे। इस मामले के सार्वजनिक होने के बाद स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
मामला मीडिया में आने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने दोनों परिसरों को A ब्लॉक और B ब्लॉक बताकर संचालन जारी रखने की बात कही। हालांकि हाल ही में सामने आए कुछ वीडियो में अस्पताल का नाम हटाया हुआ दिखाई दे रहा है, जिससे नए सवाल खड़े हो गए हैं।
सूत्रों के अनुसार पहले पुराने अस्पताल भवन में आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों का उपचार किया जा रहा था। बाद में अस्पताल को नई बिल्डिंग में स्थानांतरित कर दिया गया। अब सवाल यह है कि क्या नई बिल्डिंग में आयुष्मान योजना के तहत इलाज के लिए आवश्यक अनुमति प्राप्त की गई है या फिर पुरानी लोकेशन की मंजूरी के आधार पर ही सेवाएं संचालित की जा रही हैं।
बताया जा रहा है कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) की ओर से जारी नोटिस में पुराने अस्पताल परिसर को तीन दिन के भीतर खाली करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, पिछले कई महीनों से दोनों यूनिटों के संचालन की जानकारी होने के बावजूद किसी ठोस कार्रवाई का अभाव भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

पूरे मामले को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी है कि यदि यह मुद्दा मीडिया के माध्यम से सामने नहीं आता तो स्थिति लंबे समय तक इसी तरह बनी रह सकती थी।
मामले के सामने आने के बाद अब संबंधित विभागों से निष्पक्ष जांच और स्पष्ट जवाबदेही की मांग की जा रही है। लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।