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पंजाब की अमरिंदर सरकार ने प्राइवेट अस्पतालों को वैक्सीनेशन का अपना आदेश लिया वापस, विपक्ष ने लगाया था आरोप

By RNI Hindi Desk 
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रिपोर्ट: सत्यम दुबे

नई दिल्ली: पंजाब की कैप्टन अमरिंदर सरकार ने प्राइवेट अस्पतालों में कोरोना वैक्सीनेशन पर अपना आदेश वापस ले लिया है। मीडिया में खबर आने के बाद सरकार को अपना फैसला वापस लेना पड़ा है। सरकार ने प्राइवेट अस्पतालों से वो डोज़ भी वापस मांगी जो अभी इस्तेमाल नहीं हुई है। इसके अलावा सराकार अस्पतालों की तरफ से वैक्सीन फंड में दिया गया पैसा रीफंड करेगी।

आपको बता दें कि पंजाब सरकार ने वैक्सीन फंड जुटाने की मुहिम शुरू की थी,  उसमें निजी अस्पतालों ने जो पैसा दिया वो अमरिंदर सरकार वापस लौटाएगी। वैक्सीन निजी अस्पतालों को देने पर घोटाले का सवाल उठाया था। इसके साथ ही सरकारी अस्पतालों में फ़्री का टीका निजी अस्पतालों में महंगे दाम पर लगाया जा रहा था। पंजाव सरकार ने 80 हज़ार डोज़ प्राइवेट अस्पतालों को दिया था।

पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू ने शुक्रवार को बताया कि उन्होंने राज्य सरकार के कोरोना वायरस संक्रमण रोधी टीकों को निजी अस्पतालों को ‘देने’ संबंधी विपक्ष के आरोपों की जांच के आदेश दिए हैं. सिद्धू ने यह बयान तब दिया जब उनसे खासतौर पर विपक्ष के आरोपों के बारे में पूछा गया था. उन्होंने कहा,‘‘ मुझे जो पता चला वह मीडिया से पता चला, मैंने पहले ही जांच के आदेश दे दिए हैं और हम विधिवत जांच के आदेश देंगे। हम मामले को मुख्यमंत्री के समक्ष रखेंगे।’’

विपक्ष के लगातार हमलावर होने पर उन्होंने कहा कि टीकाकरण कार्यक्रम उनके विभाग से जुड़ा नहीं है। सिद्धू ने कहा,‘‘ टीककरण कार्यक्रम मेरे स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा नहीं है और इसे सीधे तौर पर मुख्य सचिव और विकास गर्ग देख रहे हैं, जो टीकाकरण अभियान के लिए राज्य के नोडल अधिकारी भी है।’’ उन्होंने आगे कहा कि उनका विभाग जांच, उपचार और टीका लगाने का काम करता है।

वहीं विपक्षी पार्टी शिरोमणि अकाली दल ने गुरुवार को राज्य की अमरिंदर सरकार पर ‘ऊंची कीमतों’ पर निजी अस्पतालों को कोविड-19 टीके की खुराक बेचने का आरोप लगाया था। शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने एक बयान में यहां आरोप लगाया कि राज्य में टीके की खुराक उपलब्ध नहीं हैं और आम लोगों को मुफ्त में टीके की खुराक देने के बदले उसे निजी संस्थाओं को बेचा जा रहा है। कोवैक्सीन टीके की खुराक राज्य को 400 रुपये में मिलती है और उसे निजी संस्थाओं को 1,060 रुपये में बेचा जा रहा है। बादल ने कहा कि निजी अस्पताल लोगों से प्रत्येक खुराक के लिए 1,560 रुपये ले रहे हैं।

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