बिहार में भाजपा और जेडीयू में अवैध घुसपैठियों के मुद्दे पर सार्वजनिक मतभेद
तीसरे चरण के चुनाव प्रचार के दौरान बिहार में भाजपा और जदयू में अवैध घुसपैठियों के मुद्दे पर सार्वजनिक मतभेद देखने को मिले हैं।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रैली में जो बातें कहीं, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उसे सार्वजनिक तौर पर खारिज कर दिया। लगा कि यह ऐसा मसला है, जिससे एनडीए में दरार पैदा हो सकती है।
लेकिन, विपक्षी राष्ट्रीय जनता दल का दावा है कि दोनों दलों के बीच कोई मतभेद नहीं, बल्कि सोची-समझी चुनावी रणनीति का हिस्सा है। दरअसल, बुधवार को कटिहार की रैली में योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि अगर राज्य में दोबारा एनडीए सरकार बनती है तो बांग्लादेशी घुसपैठियों को बाहर कर दिया जाएगा।
इसके लिए उन्होंने मोदी सरकार की ओर से पिछले साल लाए गए नागरिकता संशोधन कानून सीएए का हवाला दिया। जबकि, कटिहार से सटे मुस्लिम बहुल किशनगंज की रैली में नीतीश कुमार ने बिना योगी का नाम लिए कह दिया कि बाहर भेजने का अधिकार किसी को नहीं है और ये सब फालतू बातें हैं।
कटिहार की रैली में योगी आदित्यनाथ ने बांग्लादेशी घुसपैठियों को निकाल-बाहर करने का वादा किया तो किशनगंज में नीतीश ने बिना उनका नाम लिए उनपर पलटवार कर दिया। जदयू नेता बोले, ‘कुछ लोग प्रोपेगेंडा फैला रहे हैं।
देश से कौन किसको बाहर करेगा? किसी के पास किसी को भी बाहर भेजने का अधिकार नहीं है, क्योंकि सभी भारत के हैं। सामने से भले ही इस मुद्दे पर एनडीए में मतभेद नजर आ रहा हो, लेकिन राजद इसे एक रणनीति के तहत की जा रही नूरा कुश्ती मानता है।
पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी का आरोप है कि जानबूझकर विवादित मसले उछाले जा रहे हैं। उन्होंने कहा है, यह बीजेपी और जेडीयू के बीच में फिक्स गेम है। योगी आदित्यनाथ ने इसलिए मुद्दा उठाया, ताकि नीतीश कुमार उसपर जवाब दे सकें।
सीएए-विरोधी प्रदर्शन के दौरान नीतीश कुमार मूकदर्शक बने रहे। जब पीएम मोदी ने चंपारण में जयश्री राम का मुद्दा उठाया तो उन्होंने एक शब्द नहीं कहा। बीजेपी और जेडीयू किसको वेबकूफ बना रहे हैं।
शनिवार को अंतिम चरण में जिन 78 विधानसभा सीटों पर चुनाव हो रहे हैं, उनमें से बीजेपी 35 और जेडीयू 41 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। इस फेज में जिन इलाकों में चुनाव हो रहे हैं, उनमें सीमांचल के वो इलाके भी हैं, जिसके चार जिलों में मुस्लिम आबादी का काफी दबदबा है।
किशनगंज में 65 फीसदी तो कटिहार में 32 फीसदी जनसंख्या मुसलमानों की है। इनके अलावा दरभंगा, मधुबनी और पश्चिम चंपराण जिलों में भी चुनाव हो रहे हैं, जहां कई सीटों पर मुस्लिम वोटर चुनाव परिणामों का रुख बदलने का माद्दा रखते हैं।