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मिथुन लग्न की शुभ बेला पर खुले गंगोत्री धाम के कपाट, PM मोदी और CM रावत ने कराई पहली पूजा, इस दिन खुलेंगे केदारनाथ और बदरीनाथ के कपाट

By: RNI Hindi Desk 
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मिथुन लग्न की शुभ बेला पर खुले गंगोत्री धाम के कपाट, PM मोदी और CM रावत ने कराई पहली पूजा, इस दिन खुलेंगे केदारनाथ और बदरीनाथ के कपाट

रिपोर्ट: सत्यम दुबे

उत्तरकाशी: कोरोना महामारी के हाहाकार के बीच शनिवार को अक्षय तृतीया के मिथुन लग्न की शुभ बेला पर सुबह 7: 30 बजे विश्व प्रसिद्ध गंगोत्री धाम के कपाट छह माहीने के लिए खोल दिए गए। कोरोना महामारी को देखते हुए सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन के मुताबिक इस बार भी बिना श्रद्धालुओं के कपाट खोले गए। इस साल शुभ मुहूर्त पर खोले गये कपाट के बाद पहली पूजा देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व प्रदेश के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने ग्यारह सौ एक- ग्यारह सौ एक रुपये की धनराशि भेजकर की।

शुक्रवार को शीतकालीन प्रवास मुखबा गांव से मां गंगा की भोग मूर्ति को डोली यात्रा के साथ गंगोत्री धाम के लिए रवाना किया गया था। डोली यात्रा भैरोंघाटी स्थित प्राचीन भैरव मंदिर में रात्रि विश्राम के बाद शनिवार को तड़के गंगोत्री पहुंची। जिसके बाद सुबह साढ़े सात बजे गंगोत्री मंदिर के कपाट खुले।

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कोरोना महामारी के कारण इस बार भी तीर्थ पुरोहितों के गांव मुखबा में कोई विशेष उत्साह नहीं देखने को मिला। शुक्रवार को सुबह मुखबा स्थित गंगा मंदिर में मां गंगा की विशेष पूजा अर्चना की गई। इसके बाद 11:45 बजे मंदिर के गर्भगृह से मां गंगा की भोग मूर्ति के साथ ही मां सरस्वती एवं मां अन्नपूर्णा की मूर्ति को बाहर निकालकर डोली में विराजमान किया गया।

शुक्रवार को अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर दोपहर 12:15 बजे और गंगोत्री धाम के कपाट शनिवार 15 मई को अभिजीत मुहूर्त में खोल दिए गए हैं। पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने देश दुनिया के तीर्थयात्रियों व श्रद्धालुओं को बधाई दी।

इसके साथ ही बाबा केदारनाथ धाम के कपाट 17 मई और बदरीनाथ धाम के कपाट 18 मई को खोले जाएंगे। पर्यटन मंत्री ने बताया कि वैदिक मंत्रोच्चारण और धार्मिक विधि विधान के साथ गंगोत्री-यमुनोत्री के कपाट खोले गए।

पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने आगे बताया कि चारधाम यात्रा लाखों लोगों के रोजगार और आजीविका का साधन हैं। जल्द चारधाम यात्रा को सुरक्षित ढंग से श्रद्धालुओं के लिए खोलने के लिए उत्तराखंड सरकार प्रयासरत है। इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था बनाने के लिए लगातार चारधाम यात्रा से जुड़े व्यापारियों, पंडा पुरोहितों व अधिकारियों से लगातार बात की जा रही है।

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