बालाघाट जिले के दमोह क्षेत्र में स्थित कबीर पंथियों की आस्था के प्रमुख केंद्र हाथी मठ में सौंदर्यीकरण कार्य तेजी से जारी है। मठ परिसर में कुएं का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है, जबकि बाउंड्री वॉल और हाथी की प्रतिमा का निर्माण कार्य प्रगति पर है। इस कार्य को लेकर कबीर पंथ समाज में उत्साह का माहौल देखने को मिल रहा है।
निर्माण कार्य में कुछ लोगों द्वारा बाधा उत्पन्न किए जाने के विरोध में कबीर पंथियों ने प्रदेश स्तरीय बैठक आयोजित की। बैठक में बालाघाट, मंडला और अन्य जिलों से बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल हुए और अपने विचार साझा किए। समाज के लोगों ने कहा कि हाथी मठ कबीर पंथियों की गहरी आस्था से जुड़ा हुआ स्थल है और यहां चल रहे विकास कार्य को रोकने का प्रयास समाज की भावनाओं को आहत करने जैसा है।
बैठक में बताया गया कि कबीर पंथ के धर्म गुरु उग्रनाम साहब जी धर्म प्रचार के दौरान हाथी पर सवार होकर इस क्षेत्र में आए थे। इसी दौरान हाथी का निधन हो गया था, जिसके बाद उसे इसी स्थान पर दफनाकर हाथी मठ की स्थापना की गई। तब से यह स्थल कबीर पंथियों की श्रद्धा और आस्था का केंद्र बना हुआ है।
कबीर पंथियों के अनुसार, हाल ही में धर्म गुरु पंथ श्री उदित नाम साहब हाथी मठ पहुंचे थे। उनके निर्देश के बाद समाजसेवी बिहारी दास मुरचुले के नेतृत्व में मठ के सौंदर्यीकरण और निर्माण कार्य की शुरुआत की गई। समाज के लोगों ने कहा कि मठ के विकास से साधु-संतों और श्रद्धालुओं को सुविधाएं मिलेंगी तथा धर्म प्रचार को भी बढ़ावा मिलेगा।
बैठक में कबीर पंथ धर्माचार्य गुरु पंथ श्री प्रकाश मुनि नाम साहब से मुलाकात कर निर्माण कार्य में आ रही बाधाओं को दूर करने और सौंदर्यीकरण कार्य शीघ्र पूरा कराने की मांग की गई। समाज के लोगों ने कहा कि हाथी मठ केवल धार्मिक स्थल नहीं बल्कि कबीर पंथियों की सांस्कृतिक पहचान भी है।