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अब इस नाम से जानी जाऐगी पीएम मोदी कि यह योजना! मिलेंगे कई फायदे…

नई दिल्ली: मिड-डे मील, यह भारत सरकार की एक ऐसी योजना है जिसके अन्तर्गत पूरे देश के प्राथमिक और लघु माध्यमिक विद्यालयों के छात्रों को दोपहर का भोजन निःशुल्क प्रदान किया जाता है। नामांकन बढ़ाने, उपस्थिति के साथ- साथ बच्चों में पौषणिक स्तर में सुधार करने के उद्देश्य से केन्द्रीय सरकार द्वारा 15 अगस्त 1995 मे शुरु किया गया था। किंतु केंद्र सरकार द्वारा अब इस स्कीम का नाम बदलकर अब PM पोषण स्कीम कर दिया गया है।

By Amit ranjan 
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रिपोर्ट: अनुष्का सिंह

नई दिल्ली: मिड-डे मील, यह भारत सरकार की एक ऐसी योजना है जिसके अन्तर्गत पूरे देश के प्राथमिक और लघु माध्यमिक विद्यालयों के छात्रों को दोपहर का भोजन निःशुल्क प्रदान किया जाता है। नामांकन बढ़ाने, उपस्थिति के साथ- साथ बच्चों में पौषणिक स्तर में सुधार करने के उद्देश्य से केन्द्रीय सरकार द्वारा 15 अगस्त 1995 मे शुरु किया गया था। किंतु केंद्र सरकार द्वारा अब इस स्कीम का नाम बदलकर अब PM पोषण स्कीम कर दिया गया है।

बुद्धवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कि अगुवाई मे हुई केंद्रयी कैबिनेट बैठक के दौरान इस PM पोषण स्कीम को मंज़ूरी दे दी गई है। इसके तहत 11.2 लाख से अधिक सरकारी स्कूलों के बच्चों के मुफ्त में दिन का खाना मिलेगा इस योजना कि खबर पीयूष गोयल और अनुराग ठाकुर ने प्रेस कांफ्रेंस के ज़रिये दी, इस योजना के तहत 11.80 करोड बच्चो को सीधा लाभ प्राप्त होगा। केंद्र की यह योजना अगले 5 साल यानी कि 2021-22 से 2025-26 तक लागू रहेगी जिसका बजट 1.31 लाख करोड रुपये होगा।

इस बार इस योजना का आर्थिक भार केवल केंद्र सरकार पर नही होगा पीयूष गोयल और अनुराग ठाकुर ने बताया कि इस बार इस स्कीम पर केंद्र और राज्य सरकार दोनो मिलकर काम करेंगी। हालांकी इसकी अधिक ज़िम्मेदारी केंद्र कि ही होगी। जिसमे केंद्र और राज्य सरकार का अनुपात 60:40 का होगा, किंतू पहाडी और नार्थ इस्ट क्षेत्रो मे इसका अनुपात 90:10 रहेगा। गेंहू और चावल का पूरा र्खच केंद्र सरकार हि उठाऐगी।

तो वहीं आपको बता दे कि इस तरह योजना का नाम बदलने से विपक्ष ने आरोपो कि बौछार कर दि है, और जम कर इस योजना कि आलोचना कर रहा है। दरसल इस बार इस योजना मे बड़ा बदलाव है जिसके चलते सामुदायिक तौर पर भी लोगों को बच्चों के लिए खाने की व्यवस्था करने दी जाएगी। जिस पर विपक्ष का कहना है कि सिर्फ पुरानी स्कीम का नाम बदला गया है और उसे पूरी तरह से निजी हाथों में सौंपने की कोशिश की गई है। तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि “सरकार को मिड डे मील का नाम बदलने की जगह सीधा कहना चाहिए कि अडानी सभी इंफ्रास्ट्रक्चर को टेकओवर कर रहे है।“

तो वहीं दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने अपनी असहमति जताते हुऐ ट्वीट किया कि “मिड डे मील स्कीम का नाम बदल कर पीएम पोषण कर दिया गया है. नाम बदलने से यह कैसे सुनिश्चित होगा कि उत्तर प्रदेश में पीएम पोषण के नाम पर भी बच्चों को केवल नमक-तेल रोटी नहीं परोसी जाएगी? और अगर किसी ज़मीनी पत्रकार ने मामला उठाया तो उसे छह महीने जेल में नहीं काटने पड़ेंगे? “

जहाँ एक तरफ विपक्ष काफी नाराज़ नज़र आ रहा है तो वहीं दूसरी ओर केंद्र सरकार के और बीजेपी के मंत्रीयो ने इस स्कीम कि खूब सरहाना की। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ट्वीट करते हूए कहा कि बच्चों के पोषण व गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रति मोदी सरकार हमेशा से संवेदनशील रही है. देशभर के 11.2 लाख से ज्यादा सरकारी स्कूलों के 11.80 करोड़ बच्चों को मुफ्त पौष्टिक भोजन देने हेतु ₹1.31 लाख करोड़ की #PMPOSHAN योजना को मंजूरी देने पर पीएम मोदी का आभार व्यक्त करता हूं।

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