गोरखपुर। पेंशनरों की समस्याओं के समाधान और उन्हें सरकारी सेवाएं आसानी से उपलब्ध कराने के उद्देश्य से गोरखपुर में पेंशन अदालत का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पेंशनरों की शिकायतें सुनी गईं और उनके जल्द निस्तारण के लिए संबंधित अधिकारियों ने जानकारी ली। इस दौरान प्रधान नियंत्रक एवं संचार लेखा, लखनऊ अजय कुमार ने पेंशनरों को उपलब्ध डिजिटल सुविधाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बुजुर्ग पेंशनरों को छोटी-छोटी प्रक्रियाओं के लिए कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें, इसके लिए सेवाओं को अधिक से अधिक डिजिटल और घर तक पहुंचाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
अजय कुमार के मुताबिक उत्तर प्रदेश के ईस्ट और वेस्ट क्षेत्र को मिलाकर केंद्र सरकार से जुड़े करीब 24 हजार पेंशनर हैं। इनमें दूरसंचार विभाग, बीएसएनएल और संबंधित संस्थानों से सेवानिवृत्त कर्मचारी भी शामिल हैं।विभाग की कोशिश है कि पेंशन से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए बुजुर्गों को दूर स्थित कार्यालयों तक आने की जरूरत कम से कम पड़े। इसके लिए अधिकारियों की ओर से पेंशनरों के नजदीक जाकर उनकी समस्याएं सुनने की व्यवस्था पर जोर दिया जा रहा है।
पेंशन भुगतान की प्रक्रिया को डिजिटल बनाने के लिए ‘सम्पन्न’ पोर्टल का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके माध्यम से पेंशन की राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजने की व्यवस्था है। डिजिटल प्रक्रिया से पेंशन वितरण को अधिक सुविधाजनक बनाने का प्रयास किया गया है, जिससे पेंशनरों को भुगतान संबंधी जानकारी और सेवाओं के लिए अनावश्यक रूप से कार्यालय जाने की जरूरत न पड़े।
पेंशनरों के लिए डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट (DLC) की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है। इसके तहत पात्र पेंशनर मोबाइल के माध्यम से घर से ही जीवन प्रमाणपत्र की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। इसके अलावा बीएसएनएल, डाकघर, सरकारी कंप्यूटर सेंटर और कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के जरिए भी डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र से जुड़ी सुविधा ली जा सकती है।

ऐसे पेंशनर जो अधिक उम्र या अन्य कारणों से स्वयं डिजिटल प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाते हैं, उनके लिए विभाग की ओर से विशेष व्यवस्था की जा रही है। अलग-अलग क्षेत्रों में DLC कैंप आयोजित किए जाते हैं, जहां पेंशनरों को जीवन प्रमाणपत्र की प्रक्रिया पूरी कराने में सहायता दी जाती है। अधिकारियों के मुताबिक 75 से 80 वर्ष या उससे अधिक उम्र के पेंशनरों तक जरूरत के अनुसार घर पर पहुंचकर भी DLC प्रक्रिया में मदद करने का प्रयास किया जाता है।
डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट के साथ-साथ पेंशन भुगतान में आने वाली समस्याओं और राशि से जुड़ी शंकाओं को भी सुना जा रहा है। पेंशन अदालत जैसे आयोजनों के जरिए लाभार्थियों को अपनी शिकायत सीधे संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने का अवसर मिलता है। अधिकारियों ने बताया कि इस पूरी व्यवस्था का उद्देश्य बुजुर्ग पेंशनरों के लिए सेवाओं को सरल बनाना और ‘ईज ऑफ लिविंग’ को बढ़ावा देना है।
पेंशनर लाभार्थी चंद्र भूषण मिश्रा ने पेंशन अदालत को उपयोगी पहल बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से सेवानिवृत्त कर्मचारियों को अपनी समस्याएं रखने और उनके समाधान की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिलता है। उन्होंने डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट की सुविधा को भी पेंशनरों के लिए लाभकारी बताया। वहीं, पेंशनर लाभार्थी सीताराम ने कहा कि पेंशन अदालत के जरिए समस्याओं के समाधान की प्रक्रिया आसान होती है। उन्होंने डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र की सुविधा से भी बुजुर्गों को होने वाली सुविधा का उल्लेख किया।
पेंशनरों को डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ विभाग की ओर से उन बुजुर्गों तक व्यक्तिगत रूप से पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है, जिन्हें तकनीकी प्रक्रिया पूरी करने में कठिनाई होती है। गोरखपुर में आयोजित पेंशन अदालत को इसी दिशा में एक कदम के तौर पर देखा गया।