Home देश एनसी नेता उमर अब्दुल्ला को मिलेगी पत्नी से तलाक!, SC में लगाई अर्जी

एनसी नेता उमर अब्दुल्ला को मिलेगी पत्नी से तलाक!, SC में लगाई अर्जी

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रिपोर्ट : मोहम्मद आबिद
नई दिल्ली:  नेश्नल कॉन्फ्रेंस नेता उमर अब्दुल्ला किसी पहचान के मौहताज नहीं है, लेकिन इन सभी के बीच वो वैवाहिक लाइफ को लेकर उनका विवाद चल रहा है और वैवाहिक विवाद दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित है क्योंकि इसलिए हुआ है क्योंकि उनकी पत्नी पायल अब्दुल्ला  के वकील ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये सुनवाई को लेकर सहमति नहीं दी है, ऐसे में उमर अब्दुल्ला  ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

बतातें की देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट ने उमर अब्दुल्ला की याचिका पर सुनवाई करने के लिए सहमति जता दी। वहीं दूसरी तरफ उमर अब्दुल्ला ने दिल्ली हाईकोर्ट की ओर से अप्रैल, 2020 को जारी किए गए सर्कुलर को चुनौती दी है।

बतादें की मार्च 2018 में दिल्ली हाईकोर्ट ने उमर अब्दुल्ला की याचिका पर उनसे अलग रह रहीं उनकी पत्नी पायल अब्दुल्ला को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था और जिस जवाब में कहा गया था की दूसरी शादी करने के लिए तलाक चाहते हैं।वहीं दूसरी तरफ उमर ने इस आधार पर तलाक मांगा कि उनकी शादी इस हद तक टूट चुकी है कि अब पायल के साथ वापस रह पाना संभव नहीं है. जहां उमर और पायल की शादी एक सितंबर 1994 को हुई थी और वे 2009 से अलग रह रहे हैं. दंपति के दो बेटे हैं, जो अपनी मां के साथ रह रहे हैं।

नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने याचिका के जरिये दिल्ली हाईकोर्ट के उस सर्कुलर को चुनौती दी है, जिसमें कहा गया है कि ऑनलाइन सुनवाई के लिए दोनों पक्षों को सहमत होना जरूरी है। वहीं पूरे मामले में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एसए बोबडे, जस्टिस एएस बोपन्नाल और जस्टिस वी रामासुब्रमण्यदम ने दिल्ली हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को नोटिस जारी करके जवाब तलब किया है।

                              हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने उमर अब्दुल्लाक की इस याचिका पर जल्दा सुनवाई के लिए मना कर दिया और कहा कि इस मामले को उचित समय पर ही सुना जाएगा। शुरुआत में अब्दुल्ला की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि वैवाहिक मामले में अन्य पक्ष अंतिम सुनवाई के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जल्द सुनवाई की सहमति नहीं दे रहे हैं।

पीठ ने वकील कपिल सिब्बल से कहा कि क्या हम किसी को सहमति देने के लिए मजबूर कर सकते हैं? साथ ही मामले की सुनवाई के दो हफ्ते के बाद का समय दिया गया है. पिछले साल 3 नवंबर को दिल्ली हाईकोर्ट ने 26 अप्रैल, 2020 के सर्कुलर को चुनौती देते हुए अब्दुल्ला की याचिका को खारिज कर दिया था।

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