बालाघाट । पनिका समाज की राष्ट्रीय बैठक पवित्र नगरी अमरकंटक में आयोजित की गई, जिसमें समाज से जुड़े विभिन्न मुद्दों और क्षेत्रीय बंधन को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में मध्य प्रदेश सहित छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड और महाराष्ट्र से बड़ी संख्या में सामाजिक पदाधिकारी और प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक का आयोजन समाजसेवी बिहारीदास मुरचुले के नेतृत्व में किया गया। कार्यक्रम में समाज की वर्तमान स्थिति, अधिकारों और भविष्य की रणनीति को लेकर विचार-विमर्श किया गया।
बैठक में पनिका समाज को लेकर लंबे समय से चल रहे क्षेत्रीय बंधन के मुद्दे पर चर्चा की गई। समाज के पदाधिकारियों ने इस विषय पर कानूनी और राजनीतिक स्तर पर ठोस रणनीति तैयार करने पर सहमति जताई। पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष देवधर महंत ने कहा कि समाज की प्रमुख मांग पनिका जाति को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) से हटाकर पुनः अनुसूचित जनजाति (ST) की श्रेणी में शामिल करना है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1971 से पहले अविभाजित मध्य प्रदेश में पनिका समाज अनुसूचित जनजाति वर्ग में शामिल था, लेकिन बाद में इसे बिना उचित प्रक्रिया के ओबीसी वर्ग में शामिल कर दिया गया।

बैठक में शामिल सामाजिक वक्ताओं ने समाज की एकजुटता और अधिकारों की लड़ाई को लेकर अपने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि समाज के हितों के लिए संगठित प्रयास और संवैधानिक रास्ते अपनाकर आगे बढ़ने की जरूरत है। इस दौरान देवधर महंत ने कहा, “संघर्ष नहीं, याचना नहीं, अब रण होगा, संघर्ष महा भीषण होगा।” उन्होंने समाज के अधिकारों के लिए मजबूती से आगे बढ़ने का आह्वान किया।
पनिका समाज की इस बैठक में विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों ने सामाजिक एकता और संगठन को मजबूत करने पर जोर दिया। बैठक के माध्यम से समाज के मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने और आगे की कार्ययोजना तैयार करने का निर्णय लिया गया।