बैतूलः नगर परिषद आठनेर एक बार फिर अपनी कार्यप्रणाली को लेकर सवालों के घेरे में है। यह नगर परिषद प्रदेश अध्यक्ष के विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है, इसके बावजूद यहां के जिम्मेदार अधिकारियों की मनमानी थमने का नाम नहीं ले रही।

ताजा मामला स्वच्छता सर्वेक्षण टीम के निरीक्षण से जुड़ा है, जहां अपनी कमियों को छिपाने के लिए नगर परिषद ने ‘शॉर्टकट’ का सहारा लिया। विभागीय सूत्रों की मानें तो स्वच्छता टीम के आगमन की आहट सुनते ही परिषद के अधिकारियों की रातों की नींद उड़ गई। आनन-फानन में भोपाल से डस्टबिन मंगवाए गए और रातों-रात शहर के प्रमुख चौराहों को डस्टबिन से पाट दिया गया।
सवाल यह उठता है कि क्या यह कवायद वास्तव में नगर को स्वच्छ बनाने के लिए है या केवल निरीक्षण दल की आँखों में धूल झोंकने का एक सुनियोजित प्रयास? हद तो तब हो गई जब सोमवार शाम, पीक ऑवर के दौरान बस स्टैंड जैसे व्यस्त इलाके में तानाशाही पूर्ण रवैया अपनाते हुए मुख्य मार्ग को ही ब्लॉक कर दिया गया।
शादी-ब्याह के सीजन और शाम की भारी आवाजाही के बीच कचरा गाड़ियों और निजी वाहनों को आड़ा-तिरछा खड़ा कर डस्टबिन लगाने का काम किया गया। इस दो घंटे के ‘सरकारी सर्कस’ की वजह से राहगीर और वाहन चालक घंटों परेशान रहे। कुछ समय के लिए जाम की स्थिति भी बनी रही। लोग परेशान होते रहे। जहाँ अन्य शहरों में चौराहों का सौंदर्यीकरण शहर की भव्यता दर्शाता है, वहीं आठनेर नगर परिषद कचरे के डिब्बों से शहर को सजा रही है।
बैतूल से संवाददाता कमलाकर तायवाड़े की रिपोर्ट