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Mumbai : सरेराह महिला का दुपट्टा खींचना पड़ा युवक को भारी, कोर्ट ने सुनाई एक साल की कड़ी सजा

मुंबई हाईकोर्ट ने एक 23 वर्षीय युवक को महिला की दुपट्टा खींचने की जुर्म में एक साल की कठोर सजा सुनाई है। कोर्ट ने आदेश के दौरान टिप्पणी की कि, 'एक महिला के जीवन और निजता के अधिकार को सीधे प्रभावित करने वाले अपराधों में शामिल शख्स को उसके अच्छे व्यवहार के कारण नहीं छोड़ा जा सकता है।'

By Amit ranjan 
Updated Date

नई दिल्ली : अमूमन ऐसा देखा जाता है कि अक्सर उद्दंड और सड़क छाप लड़के लड़कियों या महिलाओं के साथ सरेराह छेड़छाड़ कर भाग निकलते हैं। उनके दुपट्टे खींचते हैं। उनसे छेड़खानी करते है लेकिन जब वो पकड़ में आते हैं तो उनके माफी मांगने या जुर्माना भरने या उन्हें कुछ महीनों की सजा होती है। जिसके बाद वो फिर बाहर निकलकर उसी घटना को बार-बार दोहराते हैं। इन सभी घटनाओं का ख्याल रखते हुए मुंबई हाईकोर्ट ने एक 23 वर्षीय युवक को महिला की दुपट्टा खींचने की जुर्म में एक साल की कठोर सजा सुनाई है।

कोर्ट ने आदेश के दौरान टिप्पणी की कि, ‘एक महिला के जीवन और निजता के अधिकार को सीधे प्रभावित करने वाले अपराधों में शामिल शख्स को उसके अच्छे व्यवहार के कारण नहीं छोड़ा जा सकता है।’ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट शरद एस परदेशी ने कहा कि महिला की कोई गलती नहीं है, लेकिन आरोपी अबरार खान ने सार्वजनिक स्थान पर उसका दुपट्टा खींच लिया। अदालत ने अच्छे व्यवहार के मुचलके पर युवक रिहाई को खारिज करते हुए दोषी माना और उसके ऊपर 5,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया।

कोर्ट ने नहीं दिया प्रोबेशन ऑफ ऑफेंडर्स एक्ट का लाभ

कोर्ट ने कहा कि आरोपी का यह आचरण… इंगित करता है कि उसने महिला के साथ गलत व्यवहार किया। यदि इस तरह के आचरण को प्रोबेशन ऑफ ऑफेंडर्स एक्ट के प्रावधानों का लाभ देकर नरमी से देखा जाता है, तो इससे समाज में गलत संदेश जाएगा। आरोपी के प्रति कोई भी नरमी उसे महिलाओं के खिलाफ इसी तरह के अपराध को दोहराने के लिए उकसा सकती है। प्रोबेशन ऑफ ऑफेंडर्स एक्ट एक अपराधी को सजा काटने के बजाय अच्छे व्यवहार के चलते उसे रिहा करने का प्रावधान करता है।

होली के एक दिन पहले हुई घटना

महिला ने बताया कि 24 मार्च 2016 को होली के त्योहार की पूर्व संध्या पर वह अपनी दादी के साथ बाहर गई थी। युवक पीछे से उसकी मोटरसाइकिल पर आया और जोर-जोर से हॉर्न बजाया। इसके बाद उसने उसका दुपट्टा छीन लिया। महिला ने कहा कि जब उसने इसका विरोध किया तो वह गाली-गलौज करने लगा।

इस तरह आरोपी तक पहुंची महिला

महिला ने मौके पर मौजूद अपने पति के दोस्त की मदद से आरोपी की पहचान की। चूंकि दोस्त और खान एक ही पड़ोस में रहते हैं, इसलिए उसे उसका नाम और अन्य विवरण पता चला। फिर उसने अपने पति को सूचित किया और वे पुलिस से संपर्क किया।

महिला की गवाही पर सजा

दोस्त और एक अन्य गवाह ने अदालत में गवाही दी, लेकिन दावा किया कि आरोपी ने केवल महिला के साथ बहस की थी क्योंकि उसके सम्मान को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। दोनों ने दावा किया कि आरोपियों ने दुपट्टा नहीं छीना था। लेकिन कोर्ट ने महिला के बयान पर भरोसा किया। कोर्ट ने कहा, ‘घटना होने से पहले, आरोपी और मुखबिर के बीच दुश्मनी नहीं थी। इस प्रकार, महिला के पास आरोपी के खिलाफ झूठी रिपोर्ट दर्ज करने का कोई कारण नहीं था। इन परिस्थितियों में, किसी पूर्व रंजिश के कारण आरोपी को झूठा फंसाने का सवाल नहीं उठता।’ आपको बता दें कि युवक ने चेंबूर की एक महिला का 2016 में सार्वजनिक सड़क पर दुपट्टा छीन लिया था।

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