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मोदी सरकार का गन्ना किसानों को बड़ा तोहफा, सरकार ने बढ़ाया एफआरपी, जानिए क्या है नया दर

गन्ना किसानों को मोदी सरकार ने बड़ा तोहफा दिया है, जिससे वे खुशी से झूम उठेंगे। दरअसल केंद्र सरकार ने फेयर एंड रिम्यूनरेटिव प्राइस (एफआरपी) को पांच रुपये बढ़ाकर 290 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है। आपको बता दें कि इसकी जानकारी केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने दी है।

By: Amit ranjan 
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मोदी सरकार का गन्ना किसानों को बड़ा तोहफा, सरकार ने बढ़ाया एफआरपी, जानिए क्या है नया दर

नई दिल्ली : गन्ना किसानों को मोदी सरकार ने बड़ा तोहफा दिया है, जिससे वे खुशी से झूम उठेंगे। दरअसल केंद्र सरकार ने फेयर एंड रिम्यूनरेटिव प्राइस (एफआरपी) को पांच रुपये बढ़ाकर 290 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है। आपको बता दें कि इसकी जानकारी केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने दी है। उन्होंने कहा कि आज कैबिनेट बैठक में गन्ने पर दिए जाने वाले फेयर एंड रिम्यूनरेटिव प्राइस(FRP) को बढ़ाकर 290 रुपये प्रति क्विंटल करने का फैसला हुआ है, ये 10 फीसदी रिकवरी पर आधारित होगा।

उन्होंने कहा कि अगर किसी किसान की रिकवरी 9.5 फीसदी से कम होती है तो उन्हें 275.50 रुपये प्रति क्विंटल मिलेंगे। बता दें कि इससे पहले गन्ने का एफआरपी 285 रुपये प्रति क्विंटल था यानी कि इसबार पांच रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है। आपको बता दें कि सरकार हर साल गन्ना पेराई सत्र शुरू होने से पहले केंद्र सरकार एफआरपी की घोषणा करती है। मिलों को यह न्यूनतम मूल्य गन्ना उत्पादकों को देना होता है।

गन्ना किसानों को अबतक 86,000 करोड़ रुपये का भुगतान

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि 2020-21 में गन्ना किसानों को 91,000 करोड़ रुपये का भुगतान करना था जिसमें 86,000 करोड़ का भुगतान हो गया है। ये दिखाता है कि केंद्र सरकार की योजनाओं के कारण अब गन्ना किसानों को पहले की तरह सालों-साल अपने भुगतान के लिए संघर्ष नहीं करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि आज के इस फैसले के बाद किसानों को उनके खर्च पर 87 फीसदी का रिटर्न होगा। एफआरपी के माध्यम से हम सुनिश्चित करते हैं कि हमारे गन्ना किसानों को बाकी सब फसलों से ज्यादा दाम मिले।

वहीं केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि इस फैसले से किसान गन्ना उत्पादकों को गन्ने की गारंटीयुक्त कीमत प्राप्त होगी और किसान गन्ने की खेती के लिए प्रोत्साहित होंगे। उन्होंने कहा कि, ”इससे चीनी कारखानों का प्रचलन सुप्रभावी तरीके से जारी रहेगा और यह भी सुनिश्चित होगा कि देश में चीनी का उत्पादन न सिर्फ मांग बल्कि निर्यात की पूर्ति के लिए भी उपलब्ध रहेगा। इस फैसले से देशभर में लगभग 5 करोड़ गन्ना किसान लाभान्वित होंगे।”

क्या है एफआरपी?                                                                  

एफआरपी वह न्यूनतम मूल्य है, जिस पर चीनी मिलों को किसानों से गन्ना खरीदना होता है। कमीशन ऑफ एग्रीकल्चरल कॉस्ट एंड प्राइसेज (सीएसीपी) हर साल एफआरपी की सिफारिश सरकार से करता है। सीएसीपी गन्ना सहित प्रमुख कृषि उत्पादों की कीमतों के बारे में सरकार को अपनी सिफारिश भेजती है। उस पर विचार करने के बाद सरकार उसे लागू करती है।

आपको बता दें कि एफआरपी सभी किसानों पर लागू नहीं होता है। गन्ना का अधिक उत्पादन करने वाले कई बड़े राज्य गन्ना की अपनी-अपनी कीमतें तय करते हैं। इसे स्टेट एडवायजरी प्राइस (एसएपी) कहा जाता है। उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा अपने राज्य के किसानों के लिए अपना एसएपी तय करते हैं। आम तौर पर एसएपी केंद्र सरकार के एफआरपी से ज्यादा होता है।

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