मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में पदस्थ न्यायमूर्ति वंदना कसेरकर का रविवार सुबह कोरोना के कारण निधन हो गया है। वे 60 साल की थीं। उनका दिल्ली के मेदांता अस्पताल में इलाज चल रहा था। और लम्बे समय से किडनी संबंधी बीमारी से भी जूझ रही थीं।
वह देश की दूसरी हाईकोर्ट जज हैं, जिनका कोरोना से निधन हुआ है। पिछले हफ्ते गुजरात हाईकोर्ट के न्यायाधीश जीआर उधवानी का भी महामारी की चपेट में आने से निधन हो गया था।
उनके निधन पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने श्रद्धांजलि दी है। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘माननीय न्यायमूर्ति वंदना कसरेकर के निधन का दुःखद समाचार मिला है। मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि वे दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और उनके परिजनों को इस वज्रपात को सहने की क्षमता दें। मेरी संवेदनाएं उनके परिवार के साथ हैं।’
इंदौर उच्च न्यायालय में पदस्थ माननीय न्यायमूर्ति वंदना कसरेकर के निधन का दुःखद समाचार मिला है।
मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि वे दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और उनके परिजनों को इस वज्रपात को सहने की क्षमता दें।
मेरी संवेदनाएँ उनके परिवार के साथ हैं।
ॐ शांति
— Shivraj Singh Chouhan (@ChouhanShivraj) December 13, 2020
कोरोना की रोकथाम के लिए जिले के नोडल अधिकारी अमित मालाकार ने बताया कि उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ की जज वंदना कसरेकर (60) ने शहर के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान आखिरी सांस ली।
वह पिछले कई दिन से गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती थीं। इस मामले पर अधिक जानकारी देते हुए उन्होंने बताया, “न्यायमूर्ति वंदना कसरेकर जांच में कोरोना से संक्रमित पाई गई थीं। इसके अलावा, वह लम्बे समय से किडनी संबंधी रोग से भी जूझ रही थीं।”
न्यायमूर्ति कसेरकर का जन्म 10 जुलाई 1960 को हुआ था। जानकारी के लिए बता दें कि न्यायाधीश के रूप में नियुक्त होने से पहले, कसरेकर उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ में ही दीवानी और संवैधानिक मुकदमों की पैरवी करती थीं।
फिलहाल, वह इंदौर पीठ की इकलौती महिला न्यायाधीश थीं। उन्हें 25 अक्टूबर 2014 को उच्च न्यायालय की न्यायाधीश नियुक्त किया गया था और उनका कार्यकाल नौ जुलाई 2022 को समाप्त होना था।