मध्यप्रदेश में खादी, हथकरघा और ग्राम उद्योगों को नई गति देने की दिशा में सरकार के प्रयास रंग लाते नजर आ रहे हैं। भोपाल में आयोजित पत्रकार वार्ता में कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिलीप जायसवाल ने विभाग की बीते दो वर्षों की उपलब्धियों का रिपोर्ट कार्ड प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य खादी और ग्राम उद्योगों के विस्तार के माध्यम से रोजगार सृजन, उत्पादन वृद्धि और बुनकरों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।
मंत्री दिलीप जायसवाल ने बताया कि खादी, हथकरघा और रेशम जैसे क्षेत्रों में 50 हजार से अधिक लोगों को रोजगार से जोड़ा जाएगा। इसके लिए विभिन्न योजनाओं को प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत खादी उद्योग से जुड़े उद्यमियों को 5 लाख से 50 लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे नए उद्योग स्थापित हो सकें और पुराने उद्योगों का विस्तार हो।
आगामी तीन वर्षों में प्रदेश के खादी उत्पादन केंद्रों पर नए चरखे और करघे लगाए जाएंगे। इससे उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और बुनकरों को अधिक काम मिलेगा। मंत्री ने बताया कि खादी एम्पोरियम में तैयार होने वाले सरसों की कच्ची घानी के तेल की मांग तेजी से बढ़ रही है, जिसे देखते हुए इसकी उत्पादन क्षमता पांच गुना तक बढ़ाने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है।
मंत्री ने जानकारी दी कि देवास में धागा उत्पादन का नया प्लांट एक वर्ष के भीतर स्थापित किया जाएगा। इससे धागा सस्ता होगा, कपड़ों की लागत कम आएगी और खादी व हथकरघा उत्पाद आम लोगों की पहुंच में होंगे। इसके साथ ही भोपाल के एमपी नगर में खादी से संबंधित नया मॉल विकसित किया जाएगा, जिससे खादी उत्पादों को बड़ा बाजार मिलेगा।
दिलीप जायसवाल ने कहा कि खादी एवं ग्राम उद्योग देश का सबसे पुराना उद्योग है, जिसने कारखानों के अभाव में भी समाज को वस्त्र उपलब्ध कराए हैं। उन्होंने कहा कि आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खादी अपनाने के आह्वान से छोटे बुनकरों और कारीगरों को नया रोजगार मिल रहा है और खादी को वैश्विक पहचान मिल रही है।
मंत्री ने बताया कि सरकार द्वारा माटी कला शिल्पियों को निःशुल्क स्थान उपलब्ध कराकर उन्हें व्यापार के अवसर दिए जा रहे हैं। टेराकोटा, रेशम और खादी उद्योग के विस्तार के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। इन पहलों से न केवल कारीगरों की आय बढ़ेगी, बल्कि प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
कुल मिलाकर, खादी, हथकरघा और ग्राम उद्योगों के विस्तार के लिए सरकार की यह पहल उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ रोजगार सृजन और बुनकरों के सशक्तिकरण की दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है। इससे मध्यप्रदेश में पारंपरिक उद्योगों को नई पहचान और नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है।