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International Yoga Day: आंखों की गंभीर बीमारी ग्लूकोमा में भी योगा असरदार, AIIMS की स्टडी में खुलासा

By Amit ranjan 
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नई दिल्ली : देश के जाने-माने मेडिकल संस्थान एम्स ने आंखों की बीमारी ग्लूकोमा को लेकर एक बड़ा अध्ययन किया है, जिसमें यह साबित हुई है कि योगा आंखों की गंभीर बीमारी ग्लूकोमा में असरदार है। एम्स की स्टडी के अनुसार (AIIMS study on Yoga), मेडिटेशन व सांसों की एक्सरसाइज (Meditation & Breathing Excercise of Yoga) करने से इतना पॉजिटिव असर होता कि आंखों पर पड़ने वाला दबाव भी कम तो होता है और दवा भी कम हो जाती है।

स्टडी में लगभग 20 पर्सेंट ग्लूकोमा के मरीजों में प्रेशर कम हुआ और रोजाना करने वालों की सर्जरी की आई नौबत भी नहीं पड़ी। डॉक्टरों का कहना है कि ग्लूकोमा ऐसी बीमारी है, जो एक बार हो जाए तो फिर इसे पूरी तरह से ठीक नहीं किया जा सकता है, लेकिन योगा के जरिए इसे कंट्रोल में रखा जा सकता है और इसकी वजह से होने वाले तनाव को भी कम करके अच्छे से जीवन जीया जा सकता है।

एम्स के आरपी सेंटर के डॉक्टर तनुज दादा ने कहा कि ग्लूकोमा यानी काला मोतिया ऐसी बीमारी है जो एक बार हो जाए तो फिर इसे खत्म नहीं किया जा सकता है। इस वजह से मरीज इस बीमारी से डर जाते हैं, उनकी आंखों की रोशनी पूरी तरह से खत्म होने का डर होता है। लेकिन योगा व सांस लेने की एक्सरसाइज करने से इस बीमारी को न केवल बढ़ने से रोका जा सकता है बल्कि बीमारी की वजह से होने वाले असर को भी कम किया जा सकता है।

डॉक्टर तनुज ने कहा कि एम्स में 90 मरीजों पर यह स्टडी की गई थी। जिसमें जिन मरीजों को दवा के साथ-साथ योग का यह अभ्यास कराया गया, उनमें से 20 पर्सेंट लोगों के आंखों पर असर कम हो गया। डॉक्टर ने कहा कि जब किसी को काला मोतिया होता है तो उसके अंदर ब्लड सप्लाई कम हो जाता है और दिमाग को ऑक्सिजन कम मिलती है। लेकिन जब योगा करते हैं तो इसमें भी सुधार होता है और मरीज का ब्लड फ्लो भी ठीक हो जाता है।

डॉक्टर तनुज ने कहा कि सबसे खास बात यह है कि ग्लूकोमा की वजह से जिन मरीजों की दवा चलती है, उसमें भी कमी देखी गई। अगर किसी मरीज की 3 दवा चल रही थी तो उसकी एक दवा कम हो गई। इसके अलावा इस स्टडी में यह भी दखा गया कि कुछ मरीजों का प्रेशर इतना खराब हो गया था कि उनकी सर्जरी होनी थी, लेकिन अच्छे तरीके से योगा करने पर ऐसे मरीजों की सर्जरी टल गई, उन्हें इसकी जरूरत नहीं हुई।

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