जान्स हॉपकिंस विश्वविद्यालय के मुताबिक, दुनिया भर में अब तक कोरोना के 3.58 करोड़ मामले सामने चुके है, वही 10 लाख 49 हजार 483 लोगों की कोरोना से मौत हो चुकी है।
कोरोना की अब तक कोई भी वैक्सीन नहीं आ सकी है। दुनिया की सभी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के ऊपर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। दुनिया किसी तरह कोरोना से जंग में जुटी हुई हैं।
विश्व बैंक ने कोरोना से उपजे हालात को देखते हुए अपनी चिंता जाहिर की है। विश्व बैंक ने कहा है कि कोरोना महामारी के चलते वर्ष 2021 तक लगभग 15 करोड़ लोग अत्यधिक गरीब हो सकते हैं। बैंक ने कहा कि अगर नई अर्थव्यवस्था का निर्माण करना है तो सरकारों को नए क्षेत्रों में पूंजी, श्रम और कौशल की अनुमति देनी होगी।

भारत से जुड़े आंकड़ें उपलब्ध नहीं होने के चलते वैश्विक गरीबी के अनुमान को लेकर अनिश्चितता है। कोरोना के चलते खराब हुई अर्थव्यस्था को आधार मानते हुए विश्व बैंक ने कहा है कि वर्ष 2021 तक 8.8 करोड़ से 11.5 करोड़ अतिरिक्त लोग अत्यधिक गरीब हो सकते हैं।
इस तरह वर्ष 2021 तक अत्यधिक गरीब लोगों की संख्या लगभग 15 करोड़ हो सकती है। बैंक ने कहा कि अगर महामारी ने दुनिया को नहीं जकड़ा होता तो वर्ष 2020 में गरीबी की दर घटकर 7.9 रहने की उम्मीद थी।
विश्व बैंक समूह के अध्यक्ष डेविड मलपास ने कहा, ‘महामारी और वैश्विक मंदी ने दुनिया की 1.4 फीसद आबादी को अत्यधिक गरीबी में धकेल दिया है।
अगर हमें गरीबी को कम करना है और विकास की गति को फिर से स्थापित करना है तो सरकारों को नए व्यवसायों में जाने के लिए पूंजी, श्रम और कौशल को अनुमति देनी होगी।
नए गरीब उन देशों में भी बढ़े हैं, जो पहले से ही गरीबी की समस्या से जूझ रहे हैं। मध्यम आय वाले देशों में भी पर्याप्त संख्या में लोग अत्यधिक गरीबी की सीमा के नीचे आ जाएंगे।