मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में कांग्रेस के भीतर जारी अंदरूनी सियासत और बयानबाज़ी एक बार फिर सुर्खियों में है। पूर्व मंत्री पी.सी. शर्मा के हालिया बयानों के बाद पार्टी के भीतर चल रहे विवाद और गुटबाज़ी पर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के कोर्ट प्रकरण को लेकर उठे सवालों पर पी.सी. शर्मा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे लगातार प्रदेश के विभिन्न जिलों के दौरे पर रहते हैं, ऐसे में किसी पेशी में शामिल न हो पाना कोई बड़ा मुद्दा नहीं है। उन्होंने कहा कि आगामी तारीख पर वे न्यायालय में उपस्थित हो जाएंगे।
पार्टी के भीतर चल रही बयानबाज़ी और मतभेदों पर बोलते हुए पी.सी. शर्मा ने दिग्विजय सिंह और जयवर्धन सिंह के विवाद को पारिवारिक मामला बताया। उन्होंने कहा कि यह “बाप-बेटे का आपसी विषय” है, जिसमें अन्य नेताओं को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए, क्योंकि वे आपस में समाधान निकाल सकते हैं।

कांग्रेस में “स्लीपर सेल” को लेकर चल रही चर्चा पर भी पी.सी. शर्मा ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि इस तरह के आरोप लगाने वालों को पहले आत्ममंथन करना चाहिए। उनके अनुसार, असली स्लीपर सेल वे लोग हैं जो चुनाव के समय पार्टी के खिलाफ काम करते हैं और बाद में संगठन में पद प्राप्त कर लेते हैं।
मध्य प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय द्वारा मुख्यमंत्री को लिखे गए पत्र पर प्रतिक्रिया देते हुए पी.सी. शर्मा ने कहा कि यदि सरकार में उनकी बात नहीं सुनी जा रही है तो उन्हें नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे देना चाहिए।
इन बयानों के बाद प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हो गया है। जहां कांग्रेस के भीतर अंदरूनी मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं, वहीं भाजपा सरकार पर भी विपक्ष लगातार हमलावर बना हुआ है।