भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर सकारात्मक संकेत मिले हैं। मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा है कि अमेरिका जल्द ही भारतीय उत्पादों पर लगाए गए 25% पेनल्टी टैरिफ को 10-15% तक कम कर सकता है। इस कदम से भारत का अमेरिका को निर्यात बढ़ेगा और दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्तों को नई मजबूती मिलेगी।
अमेरिका ने डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में यह अतिरिक्त शुल्क लगाया था, जिससे भारत के कई प्रमुख सेक्टर्स प्रभावित हुए। इनमें कपड़ा, रसायन, समुद्री भोजन, रत्न-आभूषण और मशीनरी जैसे सेक्टर्स शामिल हैं। अगस्त महीने में अमेरिका को भारत का निर्यात घटकर 6.87 अरब डॉलर रह गया था, जो पिछले 10 महीनों का न्यूनतम स्तर था। यदि यह टैरिफ हटता है तो इन क्षेत्रों में निर्यात को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा।
दिल्ली में हाल ही में अमेरिकी और भारतीय प्रतिनिधियों के बीच करीब सात घंटे की अनौपचारिक बैठक हुई थी। इसे काफी सकारात्मक माना जा रहा है और उम्मीद जताई जा रही है कि अगले 8 से 10 सप्ताह में शुल्क संबंधी समस्या का समाधान हो सकता है। वर्तमान में अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है, जहां भारत के कुल निर्यात का लगभग 20% हिस्सा जाता है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने अमेरिका को 86.51 अरब डॉलर का सामान निर्यात किया था और 40.82 अरब डॉलर का व्यापार अधिशेष दर्ज किया था।
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में टैरिफ लगाने का कारण भी बताया। उन्होंने कहा कि यूक्रेन युद्ध को रोकने और रूस पर दबाव बनाने के लिए भारत पर यह शुल्क लगाया गया था। हालांकि, ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ गहरा और सकारात्मक संबंध है। यदि टैरिफ में राहत मिलती है तो यह न केवल भारत के निर्यात को मजबूती देगा बल्कि भारत-अमेरिका व्यापारिक रिश्तों को भी नई ऊंचाई पर ले जाएगा।