भारत और जर्मनी के विदेश मंत्रियों के बीच हुई मुलाकात में आतंकवाद से निपटने, द्विपक्षीय व्यापार, उद्योग सहयोग, अंतरिक्ष अनुसंधान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। विदेश मंत्री एस. जयशंकर और जर्मन विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल ने संयुक्त प्रेस वार्ता में कहा कि दोनों देश रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
भारत और जर्मनी के विदेश मंत्रियों की हालिया वार्ता दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को नए स्तर तक ले जाने वाली साबित हुई है। नई दिल्ली में आयोजित इस मुलाकात के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर और जर्मन विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल ने आतंकवाद, व्यापार, तकनीक, अंतरिक्ष और वैश्विक सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर खुलकर चर्चा की।
जयशंकर ने जर्मनी के आतंकवाद विरोधी सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि भारत जर्मन उद्योग के साथ मिलकर निर्यात और निवेश के नए अवसर तलाशना चाहता है। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि जर्मन कंपनियों की चिंताओं पर भारत विशेष ध्यान देगा। इस दौरान सेमीकंडक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन, ग्रीन एनर्जी फाइनेंस, डिजिटल संवाद और साइबर सुरक्षा को सहयोग के प्रमुख क्षेत्र बताया गया।
जर्मन विदेश मंत्री ने इसरो का दौरा कर अंतरिक्ष सहयोग की दिशा में प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों नेताओं ने एयरोस्पेस और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसे उभरते क्षेत्रों में साझेदारी को गहरा करने पर सहमति जताई। वाडेफुल ने कहा कि यूरोपीय संघ का AI एक्ट वैश्विक मानकों की दिशा में पहला कदम है और भारत-जर्मनी मिलकर नैतिक और जिम्मेदार AI विकास को बढ़ावा देंगे।
शिक्षा क्षेत्र में भी सकारात्मक पहल की गई। भारत और जर्मनी ने अल्पकालिक कॉलेज विजिट के लिए फ्री वीजा पर सहमति जताई। जयशंकर ने अरिहा शाह के मुद्दे को उठाते हुए इसे बिना देरी के सुलझाने की आवश्यकता बताई।
अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी वार्ता में गहराई रही। वाडेफुल ने रूस-यूक्रेन युद्ध पर चिंता जताते हुए कहा कि भारत अपने रूस के साथ संबंधों का उपयोग शांति वार्ता को आगे बढ़ाने में करे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया पुतिन से मुलाकात का उल्लेख करते हुए भारत की भूमिका को वैश्विक शांति प्रयासों में महत्वपूर्ण बताया।
चीन के बढ़ते आक्रामक रुख पर भी दोनों देशों ने चिंता जाहिर की। वाडेफुल ने कहा कि इंडो-पैसिफिक की सुरक्षा यूरोप की सुरक्षा से जुड़ी है, इसलिए समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था बनाए रखना आवश्यक है। रक्षा और सुरक्षा सहयोग, संयुक्त सैन्य अभ्यास और जर्मन फ्रिगेट की भारत यात्रा जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।