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जिंदगी बचाने वाले अस्पताल में संचालक चंद रुपयों के लिए लगता रहा ‘मौत का इंजेक्शन’, कई मरीजों की हुई मौत

By: RNI Hindi Desk 
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जिंदगी बचाने वाले अस्पताल में संचालक चंद रुपयों के लिए लगता रहा ‘मौत का इंजेक्शन’, कई मरीजों की हुई मौत

रिपोर्ट: सत्यम दुबे

जबलपुर: कोरोना महामारी के दूसरे लहर का कहर लगातार जारी है। कोरोना से संक्रमित मरीज ऑक्सीजन और दवाईयों की कमीं से लगातार दम तोड़ रहें हैं। महामारी के दूसरे लहर ने कई हंसते-खेलते परिवारों को तबाह कर दिया। तो कई को बीच सड़क पर लाकर खड़ा कर दिया है। लोगो के इन हालातों के बाद भी अस्पताल अपनी हरकतों से बाच नहीं आ रहे हैं। महज चंद रुपयों के लिए अस्पताल संचालक ने कोविड मरीजों को रेमडेसेविर का 500 नकली इंजेक्शन लगवना दिया, जिससे कई मरीजों की जान चली गई।

मामले का खुलासा उस वक्त हुआ जब नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन रैकेट का एक सदस्य पकड़ा गया। जिसके बाद   अस्पताल संचालक का नाम सामने आया है। यह मामला मध्य प्रदेश के जबलपुर का है। जबलपुर का प्राइवेट सिटी अस्पताल कोविड मरीजों को भी भर्ती कर इलाज कर रहा है। इस अस्पताल में अप्रैल महीने के अंतिम सप्ताह में इंदौर से करीब 500 रेमडेसिविर इंजेक्शन मंगाए गए थे। यह इंजेक्शन अस्पताल संचालक सरबजीत सिंह मोखा ने मंगाए थे। कुछ दिनों पूर्व इंजेक्शन सप्लाई करने वाले एक गिरोह पकड़ा गया तो अरेस्ट हुए व्यक्ति ने सारा राज खोला।

आपको बता दें कि गुजरात पुलिस ने हाल ही में नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन की सप्लाई करने वाले एक रैकेट का पर्दाफाश किया था। इस रैकेट के सदस्य सपन जैन ने पुलिस की पूछताछ में जबलपुर के अस्पताल संचालक सरबजीत सिंह मोखा का नाम भी लिया था। पुलिस की जांच में पता चला कि सरबजीत ने पांच सौ इंजेक्शन अपने अस्पताल में खपत की है।

पुलिस की मानें तो सरबजीत ने रैकेट के माध्यम से इंदौर से जबलपुर नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन मंगाए। करीब 500 की संख्या में यह इंजेक्शन अस्पताल में ही खपा दिया गया। इस इंजेक्शन के लिए मरीजों से मोटी रकम वसूली गई।

आरोपी सरबजीत के अस्पताल में 500 इंजेक्शन का ही इस्तेमाल हुआ या इससे अधिक भी मंगाए गए यह तो जांच के बाद ही सामने आ सकेगा लेकिन इस नकली इंजेक्शन ने कई मरीजों की जान ले ली। कोविड के गंभीर पेशेंट्स को रेमडेसिविर इंजेक्शन दिया जाता है। लेकिन जीवनरक्षक इंजेक्शन के नाम पर चंद रुपयों की कथित अस्पताल संचालक ने मौत का इंजेक्शन लगवा दिया।

मामला सामने आने के बाद पुलिस ने संचालक के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। पुलिस की कई टीमें उसकी तलाश में जगह-जगह छापेमारी कर रही हैं।

आरोपी सरबजीत के बारे में स्थानीय लोगों ने बताया कि अस्पताल संचालक सरबजीत मोखा रेलवे में नौकरी किया करता था। यहां किन्हीं आरोपों की वजह से नौकरी से हाथ धोना पड़ा। इसके बाद वह प्रापर्टी डीलिंग का काम करने लगा। प्रापर्टी डीलिंग में हाथ आजमाने के दौरान उसका सामाजिक व राजनीतिक रसूख भी बढ़ा। वह राजनीतिक गतिविधियों में भी सक्रिय हो गया। इसी दौरान उसने शहर में एक अस्पताल बनवाया। अस्पताल संचालन के अलावा वह प्रापर्टी के कामों में लगा रहा। आरोप है कि वह सरकारी जमीनों पर भी कब्जा करके बड़ी-बड़ी बिल्डिंग्स खड़ा कर लिया है।

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