गुरु नानक देव जी का जन्म 1469 ईस्वी में पंजाब के तलवंडी (ननकाना साहिब, पाकिस्तान) में हुआ था। वे छोटी उम्र से ही सांसारिक भेदभाव और दिखावे से दूर रहते थे और ईश्वर की एकता पर विश्वास रखते थे।बचपन से ही उनका स्वभाव अत्यंत शांत, विनम्र और आध्यात्मिक था।
गुरु नानक जयंती कब और क्यों मनाई जाती है
गुरु नानक देव जी की जयंती कार्तिक पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है, जो नवंबर के महीने में पड़ती है। और, गुरु नानक देव जी की जयंती को ही प्रकाश पर्व के रूप में मनाया जाता है। वहीं प्रकाश पर्व सिख धर्म का सबसे प्रमुख और पवित्र त्योहार माना जाता है। यह दिन सिख धर्म के प्रथम गुरु, मार्गदर्शक और संस्थापक गुरु नानक देव जी के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने समाज में फैली जाति-पाति, अंधविश्वास, असमानता और धार्मिक कट्टरता के खिलाफ आवाज उठाई और लोगों को सत्य, सदाचार और प्रेम का मार्ग अपनाने की प्रेरणा दी। उनके जन्मदिन को मनाने का उद्देश्य उनके उपदेशों को याद करना और उन्हें जीवन में उतारने का संकल्प लेना होता है।
इस दिन गुरुद्वारों में विशेष सजावट की जाती है। सुबह-सुबह प्रभात फेरियां निकाली जाती हैं, जहाँ श्रद्धालु गुरु के भजनों और कीर्तन का गायन करते हुए गलियों और रास्तों पर चलते हैं। गुरुद्वारों में अखंड पाठ का आयोजन किया जाता है, जिसमें गुरु ग्रंथ साहिब जी का लगातार 48 घंटे तक पाठ होता है। कीर्तन, अरदास और लंगर जयंती के प्रमुख हिस्से होते हैं। लंगर के माध्यम से सभी को बिना किसी भेदभाव के भोजन कराया जाता है, जो गुरु नानक देव जी की समानता और सेवा की भावना का प्रतीक है।
गुरु नानक देव जी ने जीवनभर समाज को तीन महत्वपूर्ण संदेश दिए
गुरु नानक जयंती मनाने का अर्थ केवल उत्सव मनाना नहीं है, बल्कि उनके द्वारा दिखाए गए सत्य और मानवीय मार्ग को आत्मसात करना है। आज के समय में जब समाज में तनाव, भेदभाव और संघर्ष बढ़ता जा रहा है, गुरु नानक देव जी की शिक्षा हमें एक दूसरे के प्रति विनम्र, सहनशील और दयालु बनने की प्रेरणा देती है। इसलिए गुरु नानक जयंती का उत्सव हमें यह याद दिलाता है कि मानवता ही सबसे बड़ा धर्म है, और प्रेम ही सबसे बड़ी साधना।