विधानसभा के पिछले चुनाव में कमल रानी वरुण ने कानपुर की घाटमपुर सुरक्षित विधानसभा सीट पर कमल खिला कर इतिहास रच दिया था। लेकिन दुर्भाग्य से इस साल अगस्त में कैबिनेट मंत्री कमल रानी का कोरोना के चलते निधन हो गया। अब उपचुनाव है।
बीजेपी इस सुरक्षित सीट को सहानुभूति और दलित हितैषी छवि के सहारे फिर जीत कर इतिहास रचने की कोशिश में है। लेकिन यह तथ्य बीजेपी को परेशान भी कर रहा कि इस सीट को बीजेपी अभी तक सिर्फ एक बार फतह कर पाई है।
पिछले चुनावों पर नजर डालें तो 1957 से लेकर 2012 तक विधानसभा चुनाव में यहां मतदाताओं ने बीजेपी को कभी पसंद नहीं किया। घाटमपुर में 2017 में कमलरानी वरुण ने जीत दर्ज कर बीजेपी का खाता खोला था और उसका पुरस्कार उन्हें कैबिनेट मंत्री पद के रूप में मिला था।
बीजेपी ने कमल रानी वरुण को कैबिनेट मंत्री बनाकर यहां के बहुसंख्यक अनुसूचित और पिछड़ा वर्ग के मतदाताओं को यह संदेश भी दिया था कि बीजेपी ही उनकी असली हितैषी है।
यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार 27 अक्टूबर को घाटमपुर की चुनाव सभा में भी सपा, कांग्रेस और बसपा को परिवारवाद वाली पार्टी और भाजपा को कार्यकर्ताओं की पार्टी बताया है। उन्होंने कहा है कि सपा, बसपा, कांग्रेस ने अपनी पार्टी को परिवार की पार्टी बना रखा है।
लेकिन भाजपा के लिए प्रदेश की जनता ही परिवार है और भाजपा का एक सामान्य कार्यकर्ता भी चुनाव लड़ सकता है और शीर्ष पर पहुंच सकता है। सीएम योगी ने कहा घाटमपुर में विकास सिर्फ भाजपा ही दे सकती हैं। इसके लिए उन्होंने कमल रानी वरुण का उदाहरण दिया और कहा कमल रानी वरुण ने यहां विकास को गति दी।
उन्होंने कहा 2017 के चुनाव में घाटमपुर में बसपा एवं सपा में कड़ी टक्कर की बात कही जा रही थी, लेकिन यहां के लोगों ने साफ-सुथरी ईमानदार और कर्मठ छवि वाली प्रत्याशी कमल रानी वरुण को चुना। लेकिन आज वह हमारे बीच नहीं है, इसका हम सबको बहद अफ़सोस है।