मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पुष्प महोत्सव के संबंध में संबोधन देते हुए कहा कि यह आयोजन प्रदेश में पहली बार किया गया है और इसका उद्देश्य पुष्प उत्पादन को केवल शौक या सीमित खेती से निकालकर व्यवसायिक स्वरूप देना है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में पुष्प उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं और सरकार इसे संगठित उद्योग के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पुष्प महोत्सव के माध्यम से फूलों के व्यवसायीकरण को बढ़ावा देने के साथ-साथ प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया गया, जिससे किसानों और उद्यमियों में नवाचार और गुणवत्ता के प्रति प्रतिस्पर्धात्मक भावना विकसित होगी। इससे पुष्प उत्पादकों को बेहतर बाजार, मूल्य और पहचान मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में 40,000 से अधिक किसान पुष्प उत्पादन से जुड़े हुए हैं। लगभग 45 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में फूलों की खेती हो रही है, जो निरंतर बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि यह न केवल किसानों की आय बढ़ा रही है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बना रही है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जानकारी दी कि मध्यप्रदेश में उत्पादित लाखों टन फूल गुजरात, महाराष्ट्र सहित देश के अन्य राज्यों और विदेशों तक भेजे जा रहे हैं। इससे प्रदेश की पहचान एक उभरते हुए पुष्प उत्पादन केंद्र के रूप में बन रही है और निर्यात की संभावनाएं भी मजबूत हो रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जबलपुर क्षेत्र का बेल्ट फूस (फूलों से संबंधित उत्पाद) और पुष्प उत्पादन के लिए अत्यंत अनुकूल है। यहां जलवायु और भूमि की गुणवत्ता इस क्षेत्र को विशेष पहचान दिला सकती है। सरकार आने वाले समय में इस बेल्ट को विकसित करने पर विशेष रूप से कार्य करेगी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि पुष्प महोत्सव केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि एक शुरुआत है। आने वाले समय में पुष्प उत्पादन, प्रोसेसिंग, मार्केटिंग और निर्यात से जुड़े क्षेत्रों में और अधिक कार्य किया जाएगा, ताकि मध्यप्रदेश को पुष्प उत्पादन का अग्रणी राज्य बनाया जा सके और किसानों की आय में निरंतर वृद्धि हो।