सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल और अन्य किसान नेताओं को हिदायत दी कि विरोध प्रदर्शन के दौरान लोगों को कोई असुविधा नहीं होनी चाहिए। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने कहा कि किसानों के शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार है, लेकिन वे राजमार्गों को बाधित नहीं करें और प्रदर्शनकारियों को कानून के तहत शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए प्रेरित करें, ताकि आम जनता को कोई परेशानी न हो।
किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल की याचिका
डल्लेवाल ने सुप्रीम कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। कोर्ट ने कहा कि उन्होंने अपने साथी प्रदर्शनकारी को आमरण अनशन समाप्त करने के लिए राजी किया, और प्रदर्शन के दौरान जन सामान्य को असुविधा नहीं होनी चाहिए। पीठ ने कहा कि वे इस समय डल्लेवाल की याचिका पर विचार नहीं कर रहे हैं, लेकिन बाद में संपर्क कर सकते हैं।
किसानों की मांगें
किसान नेता अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं, जिनमें शामिल हैं।
1.एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) के लिए कानूनी गारंटी।
2.स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करना।
3.किसान और खेत मजदूरों के लिए पेंशन।
कृषि ऋण माफी
भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 को बहाल करना।
2020-21 में आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों के परिवारों को मुआवजा।
खनौरी बॉर्डर पर जारी प्रदर्शन
किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल खनौरी बॉर्डर पर 26 नवंबर से आमरण अनशन पर थे, जिन्हें पुलिस ने कुछ घंटों बाद जबरन हटा दिया और अस्पताल में भर्ती करवा दिया। बाद में 30 नवंबर को उन्होंने फिर से वहीं धरना प्रदर्शन शुरू किया। किसान 13 फरवरी से खनौरी और शंभु बॉर्डर पर डेरा डाले हुए हैं।