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विश्व पर्यावरण दिवस पर नहीं हुई ग्राम सभा, मांजरोदकला में ग्रामीणों का फूटा आक्रोश

ग्राम पंचायतों में अनिवार्य ग्राम सभा आयोजित करने के शासन के निर्देशों के बावजूद बुरहानपुर जिले के खकनार ब्लॉक की ग्राम पंचायत मांजरोदकला में ग्राम सभा आयोजित नहीं हुई। सचिव और नोडल अधिकारी के अनुपस्थित रहने से ग्रामीणों को घंटों इंतजार करना पड़ा। विकास कार्यों, रुकी मजदूरी और पंचायत योजनाओं पर चर्चा की उम्मीद लेकर पहुंचे ग्रामीणों ने प्रशासनिक लापरवाही पर नाराजगी जताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

By: BS Yadav 
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विश्व पर्यावरण दिवस पर नहीं हुई ग्राम सभा, मांजरोदकला में ग्रामीणों का फूटा आक्रोश

बुरहानपुर। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर मध्यप्रदेश शासन द्वारा प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों में अनिवार्य रूप से ग्राम सभा आयोजित करने के स्पष्ट निर्देश जारी किए गए थे। इन ग्राम सभाओं का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, विकास योजनाओं की समीक्षा और ग्रामीणों की समस्याओं पर चर्चा करना था। लेकिन बुरहानपुर जिले के खकनार ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत मांजरोदकला में शासन के निर्देशों की अनदेखी का मामला सामने आया है।

जानकारी के अनुसार पंचायत में निर्धारित तिथि पर ग्राम सभा आयोजित ही नहीं की गई। पंचायत भवन के अभाव में सामुदायिक भवन से संचालित हो रही इस ग्राम पंचायत में ग्रामीण सुबह से ही अपनी समस्याओं और विकास कार्यों से जुड़े मुद्दों को लेकर पहुंचे थे। लोगों को उम्मीद थी कि ग्राम सभा में उनकी समस्याओं पर चर्चा होगी और रुकी हुई मजदूरी सहित अन्य मुद्दों का समाधान निकलेगा, लेकिन लंबे इंतजार के बावजूद न तो पंचायत सचिव पहुंचे और न ही शासन द्वारा नियुक्त नोडल अधिकारी।

घंटों तक इंतजार करने के बाद ग्रामीणों में नाराजगी और आक्रोश बढ़ गया। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत स्तर पर विकास कार्यों, बजट आवंटन और विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी उन्हें नहीं दी जाती। लोगों का कहना है कि ग्राम सभा लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण इकाई मानी जाती है, जहां ग्रामीण अपनी समस्याएं सीधे प्रशासन के सामने रख सकते हैं, लेकिन जब ग्राम सभा ही आयोजित नहीं होगी तो उनकी बात कौन सुनेगा।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि पंचायत क्षेत्र में कई मजदूरों की मजदूरी लंबे समय से लंबित है, लेकिन इस संबंध में भी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही। लोगों का कहना है कि वे कई बार पंचायत स्तर पर शिकायत कर चुके हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो सका है।

स्थानीय नागरिकों का मानना है कि शासन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद ग्राम सभा आयोजित न होना प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर मामला है। उन्होंने मांग की है कि ग्राम सभा नहीं कराने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए तथा लंबित मजदूरी और विकास कार्यों से जुड़े मामलों का जल्द समाधान किया जाए।

अब ग्रामीणों के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि शासन के आदेशों की अनदेखी करने वाले जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होगी और लंबे समय से अपनी मजदूरी का इंतजार कर रहे लोगों को न्याय कब मिलेगा। मामले को लेकर ग्रामीणों ने प्रशासन से जवाबदेही तय करने और पारदर्शी व्यवस्था लागू करने की मांग की है।

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