उज्जैनः सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय में आवासों को लेकर बड़ी कार्रवाई शुरू हो गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन अब बाहरी कब्जों को हटाने के मूड में है। इस कार्रवाई में जनप्रतिनिधि भी शामिल हैं, जिन्हें नोटिस जारी किया गया है।

उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय में सरकारी आवासों पर कब्जा हटाने की मुहिम तेज हो गई है। हाल ही में हुई कार्यपरिषद की बैठक में तय किया गया कि विश्वविद्यालय के आवास केवल कर्मचारियों के लिए ही सुरक्षित रखे जाएंगे। इसी के तहत प्रशासन ने करीब आधा दर्जन लोगों को आवास खाली करने के नोटिस जारी किए हैं। इनमें आलोट से बीजेपी विधायक डॉ. चिंतामणि मालवीय भी शामिल हैं।
जानकारी के अनुसार, विधायक को वर्ष 2009 में ई-4 श्रेणी का आवास आवंटित किया गया था। जिसका मासिक किराया 1620 रुपए निर्धारित है। अक्टूबर 2023 में उन्होंने एकमुश्त करीब 9.09 लाख रुपए जमा किए थे। जबकि इसके बाद किराया जमा नहीं किया गया। नोटिस के जवाब में विधायक ने अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि विश्वविद्यालय से उनका कुछ वित्तीय हिसाब बाकी है। उनका दावा है कि प्रमोशन और भुगतान से जुड़े मुद्दों के कारण राशि लंबित है। वे कई बार विश्वविद्यालय प्रशासन से इस संबंध में अनुरोध कर चुके हैं।
विधायक का कहना है कि जैसे ही पूरा हिसाब हो जाएगा, वे आवास खाली कर देंगे। साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिए हैं कि यदि मामले की गहराई से जांच हुई, तो प्रक्रिया लंबी हो सकती है। इधर विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि बाहरी कब्जों के कारण 50 से अधिक कर्मचारी आवास से वंचित हैं। कई कर्मचारी जर्जर भवनों में रहने को मजबूर हैं। ऐसे में सभी आवासों को खाली कराकर कर्मचारियों को देने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
प्रशासन ने नोटिस प्राप्त करने वालों को एक माह का समय दिया है। साथ ही 21 जर्जर भवनों को हटाकर नए आवास विकसित करने की योजना भी बनाई गई है। यानी साफ है कि विश्वविद्यालय अब अपने संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए सख्त कदम उठा रहा है और इस कार्रवाई का दायरा आने वाले समय में और बढ़ सकता है।
उज्जैन से संवाददाता प्रियंक की रिपोर्ट