कहते है की किसी काम को करने की ललक हो तो उम्र मोहताज नहीं होती, एक लेख में हमने आपको बताया था कि दुनिया की नंबर 1 टेनिस खिलाड़ी रही मारिया शारापोवा के पास ट्रेनिंग करने करने तक के पैसे नहीं थे लेकिन वो दुनिया की नंबर 1 खिलाड़ी बनी और 17 साल की उम्र तक तो दुनिया को उन्होंने दिखा दिया की हौसले जिनके बुलंद हो वो रुका और थमा नहीं करते।
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आज हम आपको एक ऐसी ही जुझारू 8 साल की बच्ची के बारे में बताने वाले है जो कुदरत की गोद कहे जाने वाले मणिपुर में पैदा हुई, नेचर की गोद में पली बढ़ी लिसिप्रिया 8 साल की उम्र में 51,000 से ज्यादा पौधे लगा चुकी है और जलवायु परिवर्तन के खिलाफ पूरी दुनिया को एक करने का काम कर रही है।
बचपन से ही पेड़ पौधों से इतना प्यार और जलवायु परिवर्तन की चिंता, इस छोटी सी बच्ची ने पेड़ पौधों को ही अपने जीवन को समर्पित कर दिया है और मात्र छह साल की उम्र में लिसिप्रिया को 2018 में मंगोलिया में बोलने का अवसर प्राप्त हुआ था। वो कहती है कि हम अगर प्रकृति को नहीं बचाएंगे तो ऐसे ही आपदा आती रहेगी।
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इस 8 साल की बच्ची को स्पेन की राजधानी मैड्रिड में सीओपी25 जलवायु शिखर सम्मेलन में बोलने का मौका मिला है, उन्होंने इतना ज़ोरदार भाषण दिया की स्पेन के अखबारों ने उन्हें भारतीय ‘ग्रेटा’ बताते हुए उनकी जमकर तारीफ की है जबकि ग्रेटा की उम्र 16 साल की है।
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आपको यह भी बता दे की पिछले साल लिसिप्रिया संसद भवन भी तख्ती लेकर पहुंची थी और उन्होंने मोदी जी से कानून बनाने का भी आग्रह किया था। लिसिप्रिया आज इस देश की वो आवाज़ है जो सदियों से पेड़ पौधों को पूजता आया है और अब समय आ गया है की जलवायु परिवर्तन के इस संवेदनशील मुद्दे पर भारत बढ़ चढ़कर भाग ले।