दीपावली हर वर्ष कार्तिक माह कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि पर मनाई जाती है। इस वर्ष दिवाली शनिवार, 14 नवंबर को है। दिवाली पर देवी लक्ष्मी और गणेश महाराज की विधिवत रूप से पूजा करने का विधान है।
इस दिन पुरे मन से माता लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा अर्चना करनी चाहिए ताकि माता का आशीर्वाद आप सब पर बना रहे और जीवन में सभी सुख वैभव आपको प्राप्त हो सके। सबसे पहले आपको माता लक्ष्मी और गणेश जी के पूजा का मुहूर्त बता देते है।
इस दिन गणेश-लक्ष्मी की पूजा के साथ धन के देवता कुबेर व अपने बहीखातों की पूजा करना शुभ होता है। दिवाली के दिन से व्यापारियों का नया साल शुरू होता है। इसीलिए बहीखाता पूजन का बड़ा महत्व होता है। दिवाली वाले दिन दीप जलाना भी शुभ होता है। बहीखातों की पूजा करने से माता लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है और उस घर में कभी दरिद्रता नहीं आती है।
बही खातों की पूजा करने के लिए शुभ मुहूर्त में पूजा करनी चाहिए। नवीन खाता पुस्तकों में लाल चंदन या कुमकुम से स्वास्तिक का चिह्न बनाना चाहिए। इसके बाद स्वास्तिक के ऊपर श्री गणेशाय नमः लिखना चाहिए।
दिवाली 2020 लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त
लक्ष्मी पूजा मुहूर्त्त, 14 नवंबर : शाम 5 बजकर 30 मिनट से 7 बजकर 25 मिनट तक
अवधि : 1 घंटे 55 मिनट
प्रदोष काल : शाम 5 बजकर 27 मिनट से 8 बजकर 06 मिनट तक
वृषभ काल : 14 नवंबर शाम 5 बजकर 30 मिनट से 7 बजकर 25 मिनट तक
लक्ष्मी पूजन 2020: चौघड़िया मुहूर्त
दोपहर का समय: 2 बजकर 18 से शाम 4 बजकर 7 मिनट तक
शाम: शाम को 5 बजकर 30 मिनट से शाम 7 बजकर 8 मिनट तक
रात्रि: रात 8 बजक 50 मिनट से देर रात 1 बजकर 45 मिनट तक
दिवाली की पूजा में हमें कुछ चीजों का भी ध्यान रखना चाहिए –
भगवान विष्णु को तुलसी सबसे अधिक प्रिय होती है लेकिन देवी लक्ष्मी को तुलसी से वैर है क्योंकि यह भगवान विष्णु के दूसरे स्वरूप शालिग्राम की पत्नी है। इस नाते तुलसी देवी लक्ष्मी की सौतन है। इसलिए देवी लक्ष्मी की पूजा में तुलसी नहीं चढ़ानी चाहिए।
दीपक बायीं ओर नहीं रखना चाहिए। इसका कारण यह है कि भगवान विष्णु अग्नि और प्रकाश स्वरूप हैं। भगवान विष्णु का स्वरूप होने के कारण दीप को दायी ओर रखना चाहिए।
सफेद फूल देवी लक्ष्मी को नहीं चढ़ाएं। देवी लक्ष्मी चीर सुहागन हैं इसलिए इन्हें हमेशा लाल फूल जैसे लाल गुलाब और लाल कमल फूल चढ़ाया जाता है। देवी लक्ष्मी की पूजा तब तक सफल नहीं मानी जाती है जब तक भगवान विष्णु की पूजा नहीं होती है। इसलिए दीपावली की शाम गणेश जी की पूजा के बाद देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु की भी पूजा करें।
घर में धनतेरस से लेकर भाईदूज तक शुद्ध देसी घी का दीपक सुबह-शाम घर के पूजा स्थल एवं तुलसीजी के पास अवश्य जलाना चाहिए। दीपावली की रात को पूजन के उपरांत रातभर लक्ष्मी-गणेश के आगे घी, तिल या सरसों के तेल का दीपक जलाए रखना चाहिए।
उल्लू को माता लक्ष्मी का वाहन माना गया है इसलिए इस रात्रि अगर किसी को उल्लू दिखाई दे जाता है तो ऐसा माना जाता है की उसे स्थिर लक्ष्मी की प्राप्ति होने वाली है। उल्लू माता लक्ष्मी का वाहन कैसे बना इसके पीछे भी एक पौराणिक कथा है।
दरअसल प्राणी जगत की संरचना करने के बाद एक रोज सभी देवी-देवता धरती पर विचरण करने के लिए आए। तब पशु-पक्षियों ने कहा कि हमें वाहन के रूप में चुनें और हमें कृतार्थ करें।
लक्ष्मी जब वाहन चुनने में विचार-विमर्श कर रहीं थी तब अन्य पशु-पक्षियों में लड़ाई होने लगी। इस पर लक्ष्मीजी ने सभी को शांत कराया और कहा कि प्रत्येक वर्ष कार्तिक अमावस्या के दिन मैं पृथ्वी पर विचरण करने आती हूं। उस दिन मैं आप में से किसी एक को अपना वाहन बनाऊंगी।
रात्रि में जैसे ही लक्ष्मीजी धरती पर पधारी उल्लू ने अंधेरे में अपनी नजरों से उन्हें देख लिया और उनके समीप पहुंच गया। इसके बाद प्रार्थना कि आप मुझे अपना वाहन स्वीकार करें। तब लक्ष्मीजी ने खुशी-खुशी उसे अपना वाहन स्वीकार कर लिया।