बंगाल की खाड़ी में विकसित हो रहे चक्रवाती मौसम तंत्र के प्रभाव को देखते हुए उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में तेज झोंकेदार हवाओं, गरज-चमक और भारी बारिश की आशंका जताई गई है। मौसम के संभावित प्रभाव को देखते हुए गोरखपुर जिला प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है। राहत आयुक्त कार्यालय की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के क्रम में जिले के सभी संबंधित विभागों को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का जोर है कि संभावित खराब मौसम के दौरान जन-धन की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और किसी भी आपात स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य तत्काल शुरू किए जा सकें।
संभावित खराब मौसम को देखते हुए जिला, तहसील और विभागीय स्तर पर स्थापित आपदा नियंत्रण कक्षों को 24 घंटे सक्रिय रखने के निर्देश दिए गए हैं। संबंधित अधिकारियों को लगातार स्थिति पर नजर रखने और किसी भी आपात सूचना पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है। आमजन की सुविधा के लिए कंट्रोल रूम के संपर्क नंबर भी जारी किए गए हैं, ताकि बारिश, जलभराव, पेड़ गिरने, मकान क्षतिग्रस्त होने या किसी अन्य आपदा की स्थिति में प्रशासन तक सूचना पहुंचाई जा सके।
– 9194116252
– 9454416252
– 05512201776
इन नंबरों पर आपात स्थिति से संबंधित सूचना देने के लिए संपर्क किया जा सकता है। प्रसारण से पहले हस्तलिखित नंबरों का आधिकारिक सत्यापन जरूर कर लें।
खराब मौसम का असर किसानों की मेहनत पर न पड़े, इसके लिए कृषि विभाग को ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। किसानों को सलाह दी गई है कि जिन फसलों की कटाई की जा सकती है, उनकी कटाई मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए समय से पूरी कर लें। खेतों में कटी हुई फसल और खुले स्थानों पर रखे अनाज को सुरक्षित तथा ढके हुए स्थानों पर रखा जाए। फसल को बारिश से बचाने के लिए तिरपाल जैसी व्यवस्था करने और जलभराव वाले खेतों में पानी की निकासी पर ध्यान देने की भी जरूरत है। प्रशासन ने कृषि विभाग को स्थानीय स्तर पर किसानों तक जरूरी सूचनाएं पहुंचाने को कहा है, ताकि संभावित नुकसान को कम किया जा सके।
संभावित तेज हवाओं और भारी बारिश के दौरान पुराने मकानों, कमजोर दीवारों और जर्जर भवनों के गिरने का खतरा बढ़ सकता है। इसे देखते हुए ग्राम पंचायतों और नगरीय निकायों को अपने-अपने क्षेत्रों में असुरक्षित मकानों और भवनों की पहचान करने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे भवनों में रहने वाले लोगों को खतरे के प्रति जागरूक किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाएगा। प्रशासन ने राहत शिविरों, रैन बसेरों और अन्य सुरक्षित भवनों में आवश्यक व्यवस्था बनाए रखने पर भी जोर दिया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में प्रभावित परिवारों को तत्काल आश्रय उपलब्ध कराया जा सके।
बारिश के दौरान शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में जलभराव की समस्या से निपटने के लिए पहले से तैयारी करने को कहा गया है। विशेष रूप से उन स्थानों पर ध्यान देने के निर्देश हैं, जहां पिछले दिनों भारी बारिश के दौरान पानी जमा होने की समस्या सामने आई थी। ऐसे इलाकों में पानी निकालने के लिए पोर्टेबल पंपिंग सेट की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ ही नालों और जलनिकासी मार्गों की सफाई कराई जानी है। संबंधित विभागों को जलनिकासी व्यवस्था की निगरानी करने और जरूरत के अनुसार तत्काल संसाधन उपलब्ध कराने को कहा गया है। इसका उद्देश्य बारिश के कारण आवागमन बाधित होने और आमजन को होने वाली परेशानी को कम करना है।
तेज हवाओं के दौरान पेड़ और बड़ी शाखाएं गिरने से सड़क मार्ग अवरुद्ध होने तथा यातायात व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका रहती है। इसे देखते हुए संबंधित विभागों को जरूरी संसाधनों और कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। संभावित बाधित मार्गों पर त्वरित कार्रवाई की व्यवस्था रखने और पेड़ गिरने या अन्य कारणों से रास्ता बंद होने की स्थिति में उसे जल्द साफ कराने पर जोर दिया गया है। प्रशासन की कोशिश है कि आपातकालीन सेवाओं, एंबुलेंस और आम नागरिकों के आवागमन में अनावश्यक बाधा न आए। इसके साथ ही संबंधित अधिकारियों को मौसम की स्थिति के अनुसार आवश्यक कदम उठाने को कहा गया है।

प्रशासन ने संभावित खराब मौसम के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए स्थानीय माध्यमों, सोशल मीडिया और अन्य उपलब्ध संचार माध्यमों का इस्तेमाल किया जाएगा। लोगों से अपील की जाएगी कि मौसम संबंधी आधिकारिक चेतावनियों को गंभीरता से लें और अफवाहों पर भरोसा न करें। तेज हवाओं और गरज-चमक के दौरान खुले मैदानों में जाने, जलभराव वाले क्षेत्रों में उतरने और बड़े पेड़ों या कमजोर ढांचों के नीचे खड़े होने से बचें। बिजली चमकने के दौरान सुरक्षित भवन के भीतर रहना और अनावश्यक यात्रा से बचना भी जरूरी है। प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता दें और जरूरत पड़ने पर संबंधित अधिकारियों को सूचना दें।
खराब मौसम के दौरान सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। प्रशासन ने लोगों को सलाह दी है कि तेज हवाओं और गरज-चमक के समय खुले मैदानों, जलभराव वाले क्षेत्रों और ऊंचे पेड़ों के नीचे आश्रय लेने से बचें। कमजोर दीवारों, पुराने भवनों और बिजली के खंभों के आसपास भी सावधानी बरतें। बच्चों और बुजुर्गों को विशेष रूप से सुरक्षित स्थानों पर रखने तथा मौसम खराब होने पर गैर-जरूरी यात्रा टालने की सलाह दी गई है। नदी, नालों और पानी से भरे गड्ढों के आसपास जाने से बचना चाहिए। प्रशासन और मौसम विभाग की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन कर संभावित दुर्घटनाओं और जनहानि की आशंका को कम किया जा सकता है।
प्रशासन ने निर्देश दिया है कि यदि खराब मौसम के कारण किसी क्षेत्र में जनहानि, पशुहानि, मकान क्षतिग्रस्त होने या फसल को नुकसान पहुंचने की घटना सामने आती है, तो संबंधित अधिकारी तत्काल मौके पर पहुंचकर स्थिति का आकलन करें। प्रभावित लोगों को नियमानुसार राहत उपलब्ध कराने की कार्रवाई की जाए और नुकसान से संबंधित जानकारी निर्धारित प्रारूप में तैयार की जाए। इसके साथ ही शासन और राहत आयुक्त कार्यालय को समय से रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि आवश्यक सहायता और राहत वितरण की प्रक्रिया में देरी न हो। प्रशासन का उद्देश्य है कि आपदा की स्थिति में प्रभावित परिवारों को समय पर सहायता उपलब्ध कराई जा सके। फिलहाल संभावित चक्रवाती मौसम के प्रभाव को देखते हुए गोरखपुर जिला प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों को सतर्क रहने और जरूरी तैयारियां पूरी रखने के निर्देश दिए हैं। कंट्रोल रूम को सक्रिय रखने से लेकर जलनिकासी, फसल सुरक्षा, जर्जर मकानों की पहचान और राहत शिविरों की व्यवस्था तक, कई स्तरों पर तैयारियां सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि मौसम संबंधी चेतावनियों को गंभीरता से लें, अनावश्यक जोखिम से बचें और किसी भी आपात स्थिति में जारी कंट्रोल रूम नंबरों पर सूचना दें।