Home उत्तर प्रदेश कोरोना का कहर: पिता के बाद बेटे की भी मौत, 6 घंटे तक पड़ी रही लाश, कंधा देने को 4 लोग भी नहीं मिले

कोरोना का कहर: पिता के बाद बेटे की भी मौत, 6 घंटे तक पड़ी रही लाश, कंधा देने को 4 लोग भी नहीं मिले

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रिपोर्ट: सत्यम दुबे

नई दिल्ली: देश में कोरोना का कहर इस दौर में पहुंच गया है कि संक्रमण की चेन रोकना मुश्किल हो गया है। केंद्र सरकार से लेकर राज्य सरकारों भी बेबस नजर आ रही है। कोरोना के इस दूसरे लहर में संक्रमण की गति काफी तेज है, इसके साथ संक्रमण से इस लहर में जान गंवाने वालों का ऑकड़ा भी काफी तेजी के साथ बढ़ रहा है। हाताल तो ये हो गये हैं कि श्यमशान घाटों पर अंतिम संस्कार करने के लिए लाइन लगानी पड़ रही है। गोरखपुर से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसे जानकर आप भी दंग रह जायेंगे। पिता की मौत के बाद शिक्षक बेटे ने भी दम तोड़ दिया। शव अस्पताल से घर पहुंचा तो कोरोना के खौफ में पड़ोसियों ने दरवाजा बंदकर लिया।

आपको बता दें कि पिता की मौत होने के बाद शिक्षक बेटे ने भी दम तोड़ दिया। जब शव अस्पताल से घर पहुंचा तो कोरोना के डर से पड़ोसियों ने दरवाजा बंद कर लिया। किसी की भी वहां जाने की हिम्मत नहीं हुई। मृतक शिक्षक के भाई और भतीजे भी संक्रमित हैं। हावात ये हो गया कि उनको कंधा देने वाले चार लोग तक नहीं मिले, उनके अंतिम संस्कार का भी संकट खड़ा हो गया। इसी स्थिति में क्वारंटीन में रहने वाले दूसरे मोहल्ले के एक व्यक्ति को जानकारी हुई। उसने फोन कर प्रशासन को सूचना दी, तब करीब छह घंटे बाद शव वाहन पहुंचा। पिता को मुखाग्नि देने वाले संक्रमित भाई ने राप्ती तट पर शिक्षक का भी अंतिम संस्कार किया।

इंसानियत को झकझोर देने वाली यह घटना गोरखपुर शहर के रामजानकी नगर की है। 12 अप्रैल को कॉलोनी में रहने वाले रिटायर बिजली कर्मचारी के घर मौत ने दस्तक दी। रिटायर बिजलीकर्मी चल बसे। परिवार के मुताबिक उनकी रिपोर्ट निगेटिव थी लेकिन लक्षण कोरोना वाले ही थे। ऐसे में शिक्षक बेटे ने अपनी और दोनों भाइयों व बच्चों की 11 अप्रैल को बीआरडी मेडिकल कॉलेज में जांच कराई जिनकी रिपोर्ट पिता की मौत के एक दिन बाद पॉजिटिव आई थी। पिता का अंतिम संस्कार करने के बाद परिवार होम आइसोलेशन में था।

परिवार इस सदमे से अभी उबरा भी नहीं पाया था कि गुरुवार की देर रात शिक्षक की हालत बिगड़ गई। शुक्रवार तड़के संक्रमित भाई और भतीजे उन्हें ऑटो से एचएन सिंह चौराहे के पास एक निजी अस्पताल पर ले गए, जहां डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। यहां से उन्हें बीआरडी मेडिकल कॉलेज ले गए जहां कोविड हॉस्पिटल के सामने एंबुलेंस ड्यूटी में तैनात टेक्नीशियन ने भी मृत बताया तब सुबह करीब 7 बजे शव लेकर घर आ गए। इसके बाद देखते ही देखते आसपास के घरों के दरवाजे और खिड़कियां बंद हो गईं।

इस घटना ने प्रशासन के इंतजामों की पोल खुल गई। दो से अधिक संक्रमित होने पर एरिया को कंटेनमेंट जोन में तब्दील करना था। यह प्रक्रिया भी अब तक नहीं हुई थी। तहसीलदार को जब जानकारी हुई तो उन्होंने घर के आसपास छिड़काव करा गली को बांस-बल्ली से घेर कर कंटेनमेंट जोन में तब्दील कराया।

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