भोपालः मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने केंद्र की भाजपा सरकार पर महिला आरक्षण को लेकर “राजनीतिक छल” और “वादाखिलाफी” का गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को जानबूझकर लागू नहीं किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी बिना किसी परिसीमन की शर्त के तत्काल लोकसभा में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू करने की मांग को लेकर सड़क से सदन तक संघर्ष करेगी।
उन्होंने कहा कि इसी क्रम में कल 26 अप्रैल 2026, शाम 4 बजे भोपाल में एक विशाल पैदल मार्च आयोजित किया जा रहा है। यह पैदल मार्च प्लेटिनम प्लाज़ा से प्रारंभ होकर टीनशेड, टॉप एंड टाउन, न्यू मार्केट होते हुए रोशनपुरा चौराहा तक निकाला जाएगा। इस मार्च के माध्यम से भाजपा सरकार की महिला विरोधी नीतियों और उसकी नीयत को जनता के सामने उजागर किया जाएगा।
श्री पटवारी ने कहा कि भाजपा सरकार ने 2023 में सर्वसम्मति से पारित महिला आरक्षण कानून को लागू करने के बजाय उसे जनगणना और परिसीमन की शर्तों में उलझाकर टालने की साजिश रची है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह केवल राजनीतिक लाभ के लिए किया गया एक सुनियोजित प्रयास है, जिससे महिलाओं को उनका संवैधानिक अधिकार मिलने से रोका जा रहा है।
उन्होंने याद दिलाया कि स्व. राजीव गांधी जी की सरकार ने ही 73वें और 74वें संविधान संशोधन के माध्यम से पंचायतों और नगरीय निकायों में महिलाओं को आरक्षण दिया, जिससे आज 15 लाख से अधिक महिलाएँ नेतृत्व कर रही हैं। 1989 में जब यह बिल आया था, तब अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी जैसे भाजपा नेताओं ने इसका विरोध किया था।
सोनिया गांधी जी और डॉ. मनमोहन सिंह जी के नेतृत्व में 2010 में राज्यसभा में महिला आरक्षण बिल पारित कराया गया था। 10 साल से पूर्ण बहुमत में होने के बावजूद मोदी सरकार ने इसे लागू क्यों नहीं किया? उन्होंने कहा कि कांग्रेस की स्पष्ट मांग है कि देश की 543 लोकसभा सीटों पर तत्काल 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू किया जाए तथा इसमें पिछड़ा वर्ग, दलित और आदिवासी वर्ग की महिलाओं को भी उचित हिस्सेदारी सुनिश्चित की जाए।
श्री पटवारी ने भाजपा पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि “अगर मोदी सरकार की नीयत साफ होती, तो महिला आरक्षण को लागू करने में तीन साल की देरी नहीं होती। यह सरकार महिलाओं के अधिकारों के नाम पर केवल राजनीति कर रही है।” उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं, महिला संगठनों, युवाओं और आम नागरिकों से अपील की है कि वे इस पैदल मार्च में शामिल होकर लोकतंत्र, संविधान और महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के इस संघर्ष को मजबूत करें।