पन्नाः मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में आशा और ऊषा कार्यकर्ताओं के सब्र का बांध आखिरकार टूट गया। महीनों से रुके हुए मानदेय और लंबित एरियर को लेकर सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट का घेराव किया और जमकर नारेबाजी की।
श्रमिक संघ के नेतृत्व में मध्यप्रदेश आशा और ऊषा कार्यकर्ताओं का आरोप है कि सरकार मंचों से उनकी तारीफ तो बहुत करती है, लेकिन जब हक देने की बारी आती है, तो फाइलें दबा ली जाती हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव के नाम सौंपे गए ज्ञापन में कार्यकर्ताओं ने बताया कि उन्हें न तो घोषित ₹1000 की वार्षिक वृद्धि मिली है और न ही केंद्र सरकार द्वारा जारी अतिरिक्त ₹1500 की राशि। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने दर्द बयां करते हुए कहा कि दिवाली और रक्षाबंधन जैसे बड़े त्योहार भी उन्होंने खाली हाथ गुजारे।
आर्थिक तंगी का आलम यह है कि अब बच्चों की पढ़ाई और घर का किराया देना भी दूभर हो गया है। कार्यकर्ताओं ने दो टूक चेतावनी दी है कि सिर्फ प्रशंसा से पेट नहीं भरता। यदि जल्द ही नियमित भुगतान और सामाजिक सुरक्षा की मांगें पूरी नहीं हुईं, तो यह आंदोलन प्रदेशव्यापी और उग्र रूप लेगा।