इंदौर के ब्रिलिएंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित मध्यप्रदेश टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0 में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भाग लिया। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में सीएम ने उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से वन-टू-वन बैठक कर निवेश, नवाचार और साझेदारी पर विस्तृत चर्चा की।

कॉन्क्लेव एमपी के भविष्य का घोषणा पत्र
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि टेक्नोलॉजी आधारित विकास के रास्ते पर चलते हुए मध्यप्रदेश तेजी से उभर रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने सेना के साथ एमओयू कर रक्षा-प्रौद्योगिकी क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। सीएम ने कहा कि बाबा महाकाल और खजराना गणेश की कृपा से यह कॉन्क्लेव सफलता की नई दिशा तय कर रहा है। यह केवल आयोजन नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश के भविष्य की योजनाओं का घोषणा पत्र है।
सीएम ने बताया कि इंदौर अब बैंगलुरु जैसे बड़े तकनीकी शहरों की तरह विकसित हो रहा है और प्रदेश के अन्य शहर जबलपुर, उज्जैन, ग्वालियर और भोपाल भी तीव्र गति से विकास पथ पर बढ़ रहे हैं।
उज्जैन अब इंदौर मेट्रोपॉलिटन का हिस्सा
मुख्यमंत्री ने बड़ा एलान करते हुए कहा कि उज्जैन अब अकेला शहर नहीं, बल्कि इंदौर मेट्रोपॉलिटन का हिस्सा है। इंदौर, उज्जैन, देवास और धार को जोडकर बनाया गया यह मेट्रोपॉलिटन प्लान फिनटेक, साइंस सिटी और आधुनिक शहरी विकास को बढ़ावा देगा।
सीएम ने बताया कि स्पेस टेक्नोलॉजी रिसर्च के लिए राजा जयसिंह के समय की प्राचीन ऑब्जर्वेटरी और आधुनिक विज्ञान को जोड़ने की योजना है, क्योंकि उज्जैन पृथ्वी के मध्य बिंदु पर स्थित होने के कारण वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
15,896 करोड़ का निवेश और 64 हजार रोजगार
मुख्यमंत्री यादव ने बताया कि इस कॉन्क्लेव में कुल 65 गतिविधियाँ आयोजित हुईं, जिनसे प्रदेश में 15,896 करोड़ रुपये का निवेश आया है और 64,000 रोजगार सृजित होने की संभावनाएँ बनी हैं।
कार्यक्रम में एमपीएसईडीसी की नई इकाइयों का उद्घाटन, परियोजनाओं का भूमिपूजन और निवेशकों को आवंटन पत्र (LOA) भी वितरित किए गए। विभिन्न उद्योगों के साथ एमओयू और समझौते संपन्न हुए।
अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी नीति 2025 का मसौदा जारी
कॉन्क्लेव में मध्यप्रदेश अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी नीति 2025 का मसौदा भी पेश किया गया। इसका उद्देश्य उज्जैन को भारत के उभरते अंतरिक्ष नवाचार केंद्र के रूप में स्थापित करना है, जो खगोलीय विरासत को आधुनिक स्पेस एप्लीकेशन्स से जोड़ेगा। यह नीति निजी कंपनियों को उपग्रह निर्माण, लॉन्च सेवाओं और रिमोट सेंसिंग में भागीदारी के लिए प्रोत्साहित करेगी।
ड्रोन टेक्नोलॉजी और GCC में तेजी से प्रगति
कार्यक्रम में बताया गया कि इंदौर में नए ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) तेजी से विकसित हो रहे हैं और आईटी, फिनटेक एवं हेल्थटेक क्षेत्रों में बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ आकर्षित हो रही हैं। इसके साथ ही ड्रोन टेक्नोलॉजी में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (COE) पर भी तेजी से काम हो रहा है, जो शोध, डिजाइन, प्रोटोटाइपिंग और उद्योग-अकादमिक सहयोग को बढ़ावा देगा।
कॉन्क्लेव 2.0 ने मध्यप्रदेश की टेक्नोलॉजी आधारित विकास यात्रा को नई गति देने का संकल्प दोहराया और प्रदेश को भविष्य की तकनीक-राजधानी के रूप में स्थापित करने की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाया।