जबलपुरः कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित नवाचार पर केंद्रित कृषि मंथन कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पत्रकारों से बात की। उन्होंने कहा कि किसान वर्ष में किसानों के कई सारे कार्यक्रम किसानों की कृषि में समृद्धि आए इसके लिए पूरे वर्ष को किसान वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया है। ऐसे में समृद्ध किसान, सशक्त प्रदेश से नवाचार पर आधारित यह कृषि मंथन जवाहर लाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर में आयोजित किया गया।
जहां विविध प्रकार के अलग-अलग किसानों के हित के संबंध में बहुत सारे यंत्रों, विभिन्न प्रकार के स्टार्टअप, बहुत सारे बीजों की प्रदर्शनी लगाई गयी थी। इस कार्यक्रम के साथ कई प्रकार के लोकार्पण और भूमि पूजन भी किये गए। भारत रत्न स्व. अटल बिहारी वाजपेई की लगभग 17 करोड़ की लागत से भवन का लोकार्पण भी किया गया। नरसिंहपुर में गन्ना रिसर्च सेंटर का नया यूनिट शुरू हुआ है। इसी के साथ हमारे अलग-अलग प्रकार के निमित उद्यमियों को हितग्राहियों को उनके हितलाभ वितरण का कार्यक्रम भी रखा गया।
पूरे वर्ष में हमारी कृषक कल्याण की मनोभावना है, जिस पर काम कर रहे हैं। एग्रीकल्चर में सभी प्रकार के नवाचार, नई तकनीक देश के साथ विदेश से भी कई विद्वान आए हैं। जो सभी के साथ अपने अनुभवों को साझा करेंगे। उम्मीद करेंगे कि इन सभी के माध्यम से किसानों की आय बढ़े, हमारी फसलों का सही उत्पादन मिले, कम पानी में बेहतर फसल हो, बिजली, पानी, खाद सबके अंदर समेकित रूप से फसल से जितनी आमदानी बढ़े इस पर सरकार काम कर रही है।
सरकार के इन सारे प्रयासों से पूरे प्रदेश में अनुकूलता का माहौल बना हुआ है। फसलों का उत्पादन बढ़ रहा है। गेंहू का उत्पादन भी मध्य प्रदेश के अंदर सबसे बेहतर स्थिति में आया है यहां तक कि कई मामलों में हमने पंजाब को भी पीछे छोड़ा है।
कल से हम किसानों के लिए उपार्जन चालू कर रहे हैं। गेंहू के 2625 का दाम देने के लिए हमने उसका सारा प्रबंधन कर लिया है। यद्यपि बहुत सारी चुनौतियां थी, वैश्वक स्तर के हालात भी सबके सामने हैं, लेकिन किसानों के प्रति जो हमारी प्रतिबद्धता है हमारे लिए अन्नदाता सर्वोपरि है।
उन्होंने कांग्रेस के मित्रों से कहा कि वो कर्मकांड छोड़ें और अपने पाप गिन लें कि उनके समय में न सिंचाई का रकवा था, खेत में बिजली नहीं थी, न पानी का प्रबंधन था। आज दो साल में हमने 10 लाख हेक्टेयर से ज्यादा तो हमने सिंचाई का रकबा बढ़ा दिया है। जिसे हम पांच साल में 100 लाख हेक्टेयर तक ले जाने वाले हैं।