भोपालः विधानपरिषद हॉल में तीन राज्यों के युवा विधायकों की दो दिवसीय सम्मेलन शुरू हो गया है। सम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में सम्मेलन की शुरुआत वंदे मातरम गान के साथ हुआ।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि लोकतांत्रिक स्वरूप मूलतः हमारा नैसर्गिक गुण है। अनेकता में एकता भारत की विशेषता है। मतभिन्नता भी हमारी पुरानी वैचारिक परंपरा है। यहां अपने विचारों, तर्कशक्ति और शास्त्रार्थ के आधार पर निर्णय होता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब हम दुनिया के अंदर सबसे बड़े लोकतंत्र के रुप में अपनी पहचान बना रहे हैं। यहां तक कि दूसरे लोकतंत्र वाले देश भी हमसे सीख रहे हैं। उन्होंने सम्मेलन में मौजूद विधायकों से कहा कि आप भाग्यशाली हैं कि वे कम उम्र में ही आ गए। लेकिन विरासत के लोकतंत्र को गौरवान्वित करने के लिए हमारी दोहरी जवाबदारी है। जनता के साथ हमारा कैसा संबंध होना चाहिए। जनता के बीच बने रहने के लिए अपने कार्यक्षेत्र, जिले और विधानसभा के अंदर भी हमारी भूमिका है। इसलिए विनम्रता को भी ध्यान में रखना चाहिए।

उन्होंने कहा कि हमे राजनीतिक क्षेत्र में होने के बावजूद भी हम अन्य गतिविधियों को प्रोत्साहित करना चाहिए। लंबे समय तक लोगों को सीखने के लिए क्या चीज अच्छी हो सकती है। अपने अदंर की मनस्थिति भी इसमें डूबने वाली होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अध्ययन के लिए भी पर्याप्त समय रखें बगैर कोई तनाव पाले अपने शरीर की भी चिंता करनी चाहिए। पहला सुख निरोगी काया शरीर के साथ अपने काम भी चिंता करते रहो। अपने परिवार का भी ध्यान रखें। बड़ी परेशानी आने पर भी उसका शांति के साथ रास्ता निकालो। जो आपके लिए, समाज के लिए और परिस्थिति के लिए भी अनुकूल हो।

पार्टी के साथ किसी निर्णय पर अनुशासन के साथ बैलेंस भी बनाए रखना है। भगवान राम हमारे आदर्श इसीलिए हैं क्योंकि उनको जहां सिहांसन मिलना था लेकिन उन्हे वनवास मिल गया। यह हमारे लिए सीखने की बात है। मुख्यमंत्री ने विक्रमादित्य, द्वारकाधीश का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने बच्चों को राजा नहीं बनाया।

आज के दौर में जब दुनिया हमारी तरफ देख रही है। भारत जब 2047 अमृत काल की तरफ बढ रहा है। विगत 75 साल में दुनिया के तमाम देशों में लोकतंत्र नहीं बचा है लेकिन भारत अपने बलबूते लगातार आगे बढ़ रहा है। सरकारें बदलती रही हैं लेकिन देश के लोकतंत्र और मजबूत हुआ है।