दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि वो किसानों के समर्थन में कल एक दिन का उपवास रखेंगे। इसके साथ ही उन्होंने पार्टी के कार्यकर्ताओं और समर्थकों से भी उपवास रखने की अपील की है।
उन्होंने कहा कि सब लोग अपने घर मे एक दिन का उपवास रखें और किसानों की मांग का समर्थन करें। कल आंदोलन में शामिल सभी किसान संगठनों के नेता भी उपवास करेंगे. दिल्ली बॉर्डर पर किसानों के आंदोलन का आज 18वां दिन है।
अरविंद केजरीवाल ने कहा, “मैं आप कार्यकर्ताओं, समर्थकों और जनता से अपील करता हूं कि वे किसानों के समर्थन में कल एक दिवसीय उपवास करें. मैं कल भी उपवास करूंगा.”
इसके साथ ही उन्होंने कहा, “कुछ केंद्र सरकार के मंत्री और बीजेपी नेता कह रहे हैं कि किसान राष्ट्र-विरोधी हैं. कई पूर्व सैनिक, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी, गायक, मशहूर हस्तियां, डॉक्टर, व्यापारी किसानों का समर्थन कर रहे हैं. बीजेपी से पूछना चाहते हैं कि क्या ये सभी लोग भी देशद्रोही हैं?”
अरविंद केजरीवाल ने कहा, “कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों की सभी मांगों को केंद्र को तुरंत स्वीकार करना चाहिए और एमएसपी की गारंटी के लिए विधेयक लाना चाहिए।
केंद्र को अहंकार छोड़ देना चाहिए और किसान जिन तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं उन्हें रद्द कर देना चाहिए।” मुख्यमंत्री ने डिजिटल संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए ये बातें कही।
डिजिटल कॉन्फ्रेंस में सीएम ने कहा कि मैं पूछना चाहता हूं कि यहां पर बहुत से पूर्व सैनिक बैठे हुए हैं, जिन्होंने देश की रक्षा करने के लिए अपनी जान की बाजी लगाई थी. क्या यह सभी लोग anti-national हैं।
ऐसे कितने ही खिलाड़ी हैं, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए नाम कमाया और मेडल जीतकर लाए, वो किसानों के साथ बैठे हैं, अपने-अपने घरों में बैठकर दुआएं भेज रहे हैं क्या यह सभी anti-national हैं? कितने ही सिंगर और सेलिब्रिटी हैं जो किसानों के बच्चे हैं और किसानों के परिवार से आते हैं। यह सब लोग समर्थन कर रहे हैं, क्या यह सब लोग anti-national हैं।
केजरीवाल ने कहा कि जब हम अन्ना आंदोलन कर रहे थे तब रामलीला मैदान में आंदोलन हो रहा था तो हमारे खिलाफ भी ऐसे ही साजिश की जा रही थी। कांग्रेस की तरह आज बीजेपी भी किसानों के आंदोलन को बदनाम करने कोशिश कर रही है। कड़े शब्दों में सीएम ने कहा कि इस देश के किसानों को anti-national कहने की हिम्मत मत करना
सीएम ने आगे कहा कि पहले अनाज के स्टोरेज की लिमिट होती थी, जमाखोरी होने पर उस पर कार्रवाई होती थी। जमाखोरी करना जुर्म होता था क्योंकि इसकी वजह से किल्लत होती थी।
उन्होंने कहा अब सरकार जो कानून लाई है उसमें जमाखोरी करना जुर्म नहीं है और कितनी भी जमाखोरी की जा सकती है। ऐसे में जिनके पास पैसा है वह लोग बहुत सारा अनाज स्टोर करके अपने पास रख लेंगे और महंगाई बहुत बढ़ जाएगी।
सीएम ने कहा कि कोई यह गलतफहमी में ना रहे की इस कानून के विरोध में केवल कुछ किसान हैं, जो धरने पर बैठे हुए हैं बल्कि देश का एक-एक आदमी इन कानूनों को समझ रहा है। मेरी केंद्र सरकार के साथ गुजारिश है कि इन तीनों बिलों को रद्द किया जाए और एमएसपी पर किसानों की फसल खरीदने का बिल बनाया जाए।
इस बीच भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष राकेश टिकैत ने कहा कि हमें नजर रखने की जरूरत है ताकि कोई गलत तत्व हमारे बीच न हों। हमारे सभी युवाओं को सतर्क रहने की जरूरत है। अगर सरकार बात करना चाहती है तो हम एक समिति गठित करेंगे और आगे का निर्णय लेंगे।
वहीं किसान नेता जसबीर सिंह ने कहा कि केंद्रीय कृषि मंत्री से आज मिलने वाले 90 लोगों का खेती से कोई लेना-देना नहीं है। 10 किसान जो बैठक में उपस्थित थे उनके पास अन्य व्यवसाय भी हैं। उन्हें उत्तराखंड से एक राजनीतिक नेता द्वारा यहां लाया गया।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार जहां तीनों कृषि कानूनों को कृषि क्षेत्र में बड़े सुधार के तौर पर पेश कर रही है, वहीं प्रदर्शनकारी किसानों ने आशंका जताई है कि नये कानूनों से एमएसपी और मंडी व्यवस्था खत्म हो जाएगी और और वे बड़े कॉरपोरेट की दया पर निर्भर हो जाएंगे।