पन्ना: मझगाय बांध परियोजना के जलभराव क्षेत्र में लगातार बारिश और रेड अलर्ट के बीच ग्रामीणों का विरोध प्रदर्शन जारी है। बिना मुआवजा और पुनर्वास की व्यवस्था किए बांध में पानी भरे जाने का आरोप लगाते हुए ग्रामीण 15वें दिन भी जल-सत्याग्रह पर डटे हुए हैं। जय किसान संगठन के बैनर तले अमित भटनागर के नेतृत्व में ग्रामीणों ने ‘चिता आंदोलन’ शुरू किया है।ग्रामीणों का दावा है कि जलभराव के कारण मड़लिया, टपरियां और कुंवरपुर सहित कई गांव प्रभावित हुए हैं। कई घरों में पानी घुसने से अनाज और गृहस्थी का सामान खराब होने की बात कही जा रही है। मूसलाधार बारिश के बीच जलभराव बढ़ने से प्रभावित परिवारों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
मुआवजे के बिना मकान गिराने का आरोप
प्रभावित ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि उन्हें पूरा मुआवजा दिए बिना प्रशासन की ओर से जेसीबी के जरिए मकान ढहा दिए गए। उनका कहना है कि विस्थापन से पहले मुआवजा और पुनर्वास की व्यवस्था की जानी चाहिए थी। ग्रामीण भूमि अर्जन, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 के तहत अपने अधिकारों का हवाला देते हुए मुआवजे और पुनर्वास की मांग कर रहे हैं। उनका दावा है कि परियोजना से जुड़े विस्थापन के कई मामलों में वर्षों बाद भी भुगतान नहीं हुआ है।
15 दिन से जल-सत्याग्रह, स्वास्थ्य पर असर
लगातार 15 दिनों से पानी में खड़े होकर आंदोलन करने के कारण प्रदर्शनकारियों की स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां भी सामने आने की बात कही जा रही है। ग्रामीणों के मुताबिक, दूषित पानी में लगातार रहने से आंदोलनकारियों के पैरों में घाव और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो रही हैं।आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक प्रभावित लोगों के बैंक खातों में पूरा मुआवजा नहीं पहुंचता, तब तक सत्याग्रह जारी रहेगा।
बारिश के बीच बढ़ी प्रशासन की चुनौती
एक तरफ क्षेत्र में लगातार बारिश और जलभराव की स्थिति बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर मुआवजे और पुनर्वास को लेकर ग्रामीणों का आंदोलन जारी है। ऐसे में प्रशासन के सामने प्रभावित परिवारों की सुरक्षा और उनकी मांगों के समाधान, दोनों की चुनौती है। ग्रामीणों की मांग है कि प्रभावित परिवारों को निर्धारित मुआवजा उपलब्ध कराने के साथ उचित पुनर्वास सुनिश्चित किया जाए और जलभराव से हुए नुकसान का भी संज्ञान लिया जाए।
राजेश रावत की रिपोर्ट