रिपोर्ट: सत्यम दुबे
नई दिल्ली: आचार्य चाणक्य का नाम आते ही लोगो में विद्वता आनी शुरु हो जाती है। इतना ही नहीं चाणक्य ने अपनी नीति और विद्वाता से चंद्रगुप्त मौर्य को राजगद्दी पर बैठा दिया था। इस विद्वान ने राजनीति,अर्थनीति,कृषि,समाजनीति आदि ग्रंथो की रचना की थी। जिसके बाद दुनिया ने इन विषयों को पहली बार देखा है। आज हम आचार्य चाणक्य के नीतिशास्त्र के उस नीति की बात करेंगे, जिसमें उन्होने बताया है कि ये तीन गुण महिलाओं को बनाते हैं श्रेष्ठ, आइये जानते हैं वो तीन गुण…
1 विनम्रता और दया: आचार्य चाणक्य ने बताया है कि जिन स्त्रीयों में विनम्रता और दया होता है, वो स्त्री समाज को दिशा दिखाती है। उन्होनो तर्क दिया कि दया और विनम्रता से पूर्ण स्त्रीयां सदैव लोगों से सम्मान प्राप्त करती हैं। इन स्त्रीयों की बातों को वरियता दी जाती है, इसके साथ ही ये क्रोध पर विजय प्राप्त करती है और सभी के प्रति करूणा का भाव बना रहत है। ऐसी स्त्री कुल का भी नाम रोशन करती है.
2 धर्म का पालन करने वाली: आचार्य चाणक्य ने बताया है कि धर्म का पालन करने वाली स्त्री हमेशा यश प्राप्त करती है। ऐसी स्त्रीयों का लोग अनुसरण करते हैं। धर्म का पालन करने वाली स्त्रीयां सही और गलत को आसाना से पहचान कर सकती हैं। आचार्य़ चाणक्य ने तर्क दिया कि ऐसी स्त्रीयां हमेशा समाज को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाती हैं।
3 धन का संचय: आचार्य चाणक्य ने श्रेष्ठ स्त्रीयों का तीसरा गुण बताया है, धन संचय करने वाली स्त्री। चाणक्य ने कहा है कि जो स्त्रीयां धन की बचत करती हैं, वो हमेशा अपने परिवार के बुरे वक्त में रक्षा करने वाली होती है। वहीं इसके विपरीत जो स्त्रीयां आय से अधिक धन का व्यय करती है वह सदैव परेशानी उठाती है। चाणक्य ने तर्क दिय़ा है कि विपत्ति के समय धन ही सच्चा मित्र होता है। इसलिए धन की बचत करना चाहिए। ऐसी स्त्रीयां अपने परिवार के लिए लक्ष्मीं होती हैं।