चाणक्य नीति के अनुसार व्यक्ति को हमेशा कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। जो व्यक्ति सफलता की सीढ़ी को छूता है, और अपने लक्ष्य को लेकर लगातार गंभीर रहता है, उसे भी जीवन में कुछ बाधाओं का सामना करना पड़ता है।
प्रत्येक सफल व्यक्ति के कुछ ज्ञात और अज्ञात शत्रु भी होते हैं। ये दुश्मन हमेशा आपकी सफलता में बाधा डालने की कोशिश करते हैं। इसलिए शत्रु के मामले में हमेशा गंभीर और सतर्क रहना चाहिए।
वाणी की मिठास– चाणक्य नीति कहती है कि सफलता में वाणी का विशेष योगदान होता है। जिन लोगों की वाणी में मधुरता नहीं होती, वे सफलता पाने के लिए हमेशा संघर्ष करते रहते हैं। ऐसे लोगों को दूसरों से सहयोग मिलना भी मुश्किल होता है।
वाणी दोष से शत्रुओं और प्रतिद्वंदियों की संख्या में भी वृद्धि होती है। ऐसे लोगों के ज्ञात और अज्ञात शत्रु भी अधिक होते हैं। इसलिए वाणी दोष को दूर करने का प्रयास करना चाहिए। वाणी में मधुरता लाने का प्रयास करना चाहिए। वाणी की मधुरता में शत्रु को मित्र बनाने की क्षमता होती है।
धन और ज्ञान में वृद्धि– चाणक्य नीति कहती है कि यदि शत्रु को परास्त करना है तो व्यक्ति को अपने ज्ञान और धन में निरंतर वृद्धि करनी चाहिए। जहां लक्ष्मी जी की कृपा से व्यक्ति में आत्मविश्वास आता है, वहीं ज्ञान की देवी सरस्वती की कृपा से व्यक्ति को दुख और अंधकार से दूर रखता है।
मनुष्य को अपने ज्ञान में निरन्तर वृद्धि करते रहना चाहिए। जिन लोगों पर मां सरस्वती और लक्ष्मी जी की कृपा बनी रहती है, उन लोगों को शत्रुओं का भय नहीं रहता। ऐसे लोगों से दुश्मन भी डरते हैं।
इंसान की नजरें किसी के प्रति कब बदल जाए ये कहना मुश्किल है। हो सकता है कि सामने वाला व्यक्ति आपको बहुत पसंद हो। लेकिन अचानक वो कोई ऐसा काम कर दे, जिसकी आपको उम्मीद ना हो। ऐसे में आपकी नजरें बदल सकती हैं।
हो सकता है कि जिस व्यक्ति को आप सम्मान के साथ देखते हों। बाद में आप उसे घृणा की नजर से देखें। इसी वजह से आचार्य चाणक्य ने कहा है कि इतनी जल्दी दुनिया की कोई चीज नहीं बदलती जितनी जल्दी इंसान की नीयत और नजरें बदल जाती हैं।